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कमरों की कमी, एक कक्षा में बैठती हैं ९० छात्राएं

8 वर्ष पहले
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ञ्चपुराने जर्जर शाला भवन में लगती है कक्षाएं
उमाशंकर चन्द्रायण - पिपरिया।
शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पिपरिया में छात्राएं असुविधाओं के बीच पढऩे को मजबूर है। विद्यालय में कमरों की कमी, स्टॉफ, खेल शिक्षक, संगीत शिक्षक एवं कई अन्य विषयों के शिक्षकों की कमी से छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वर्तमान में 1950 के पुराने जर्जर हो चुके शाला भवन के एक कमरे में क्षमता से अधिक छात्राएं बैठकर पढ़ाई कर रही है।
शिक्षकों की कमी
प्राचार्य एसके रघुवंशी ने बताया कि विद्यालय में 35 पद स्वीकृत है जिनमें से 17 शिक्षक है। अंग्रेजी, संस्कृत, भौतिक, रसायन सहित अन्य विषयों के शिक्षक नहीं है। अतिथि शिक्षकों के सहारे कार्य चल रहा है। लंबे समय से खेल शिक्षक के पद रिक्त है और प्रयोगशाला के संचालन के लिए संबंधित शिक्षकों की भी कमी है। ऐसे में छात्राओं को लेब से संबंधित जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। छात्रा संध्या कहार ने बताया कि खेल सामग्री ताले में रखी है, छात्राओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
खेल शिक्षक होना चाहिए
छात्रा फरहीन बानो ने बताया कि विद्यालय में खेल शिक्षक नहीं है, छात्राएं खेल स्पर्धाओं में भाग नहीं ले पाती है। स्वयं ही छात्राओं को परिश्रम कर स्पर्धा में भाग लेना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी तब होती है जब जिला स्तर पर कोई प्रतियोगिता होती है तो हमारे साथ कोई शिक्षक जाने को तैयार नही होता, तब मजबूरी में परिजन को साथ ले जाना पड़ता है। जिससे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।



पिपरिया। क्षमता से अधिक छात्राएं एक कक्ष में पढ़ाई करते।

परेशानी होती है

विद्यालय में शिक्षकों और कमरों की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है। खेल शिक्षकों की भी कमी है, छात्राओं को जिला या प्रदेश स्तर पर खेलों में हिस्सा लेने में कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है।

प्राचार्य एसके,रघुवंशी

उच्च स्तर पर होगा

स्कूल में समस्या तो है प्राचार्य के माध्यम से उच्च अधिकारियों अवगत करा दिया गया निराकरण उच्च स्तर पर ही होगा ।

जीपी साकेत, विकासखंड शिक्षा अधिकारी

भवन की दीवार में दरारें

पुराने जर्जर हो चुके विद्यालय में वर्तमान में 18 कमरे है और छात्राओं की संख्या लगभग 12 सौ है। फर्नीचर के अभाव में छात्राएं नीचे बैठकर पढ़ती है। हालात यह है कि एक कक्ष में 90 से 100 के बीच में छात्राएं बैठती है। छात्रा दमयंती व्यास ने बताया कि कई कक्षा में जब पूरी छात्राएं आ जाती है तब खड़े होकर पढ़ाई करना पड़ता है। भवन की पुरानी दीवारों में दरार आ चुकी है, हर समय खतरा बना रहता है। हालांकि छात्रा हर्षा अग्रवाल ने बताया कि नया भवन 9 कक्षों का बन रहा है पर वह भी छोटा पड़ेगा। शाला के प्राचार्य एसके रघुवंशी ने बताया कि सीएम की घोषणा पर आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा 1 करोड़ 23 लाख रुपए की लागत से 9 कमरे वाले नये भवन का निर्माण हो रहा है। पर चार कक्षाओं में छात्राओं की संख्या को देखते हुए यह भी छोटा पड़ेगा। पुराने भवन में कक्षाएं संचालित करनी पड़ेगी।



समस्या - नहीं है पर्याप्त शिक्षक, पुराने भवन में लगती है कक्षाएं