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7 वर्ष पहले
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ञ्चसर्वे और प्रतिवेदन में उलझा है मामला, आठ स्कूलों की सूची और तैयार
शैलेष जैन - हरदा
जिला प्रशासन से कंडम घोषित हो चुके प्राइमरी और मिडिल स्कूलों को ढहाने का काम साल भर से सर्वे और प्रतिवेदन में उलझा हुआ है। ऐसे 39 स्कूल भवन हैं जिन्हें खतरनाक माना गया है। जबकि पीडब्ल्यूडी अपनी रिपोर्ट में कंडम घोषित कर चुका है। ये स्कूल मरम्मत के लायक भी नहीं बचे। अब आठ अन्य जर्जर स्कूलों की सूची के साथ जिला शिक्षा केंद्र डीपीसी से एक पत्र पीडब्ल्यूडी ईई को भेजा गया है। पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट में कंडम घोषित होने के बाद भी भवन खतरनाक हालत में खड़े हैं। भवन ढहाने की यह प्रक्रिया इतनी लंबी है कि विभागीय दफ्तर में पत्रों की मोटी फाइल तैयार हो चुकी है। दूसरी ओर खतरनाक स्कूल भवनों से हादसे का खतरा मंडरा रहा है वहीं ये असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का अड्डा भी बन गए हैं।
इनके अलावा जिले के आठ और जर्जर स्कूलों भवनों को कंडम घोषित करने का पत्र डीपीसी ने 27 जनवरी 14 को पीडब्ल्यूडी ईई को भेज दिया है। पत्र में डीपीसी ने माना है कि पुराने भवनों से हादसा होने का खतरा है और खाली भवन असामाजिक गतिविधियों का कारण बने हुए हैं। जिन आठ स्कूल भवनों को पीडब्ल्यूडी से कंडम घोषित होना है उनमें हरदा के नांदरा व उड़ा, टिमरनी के चंद्रखाल, बड़झिरी, सिगोड़ा, खमगांव और खिरकिया में जिनवान्या गांव के
दो स्कूल हैं।