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अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने सुनाई कविता
ञ्च भोपाल, रायसेन, बैतूल के कवियों ने की शिरकत
नगर संवाददाता - मुलताई
प्रभात पट्टन में बुधवार रात को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी कविताओं से लोगों को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया। कड़ाके की ठंड के बाद भी देर रात तक श्रोताओं ने कवि सम्मेलन का आनंद उठाया। कवियत्रि नम्रता श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना से कवि सम्मेलन की शुरुआत की। इसके बाद भोपाल से आए कवि जलाल महक ने कपड़े पहनकर गांव में गंजे भी आ गए, करने हमारे शहर में दंगे भी आ गए कविता से वर्तमान परिवेश को प्रस्तुत किया। झांसी से आए कवि देवेंद्र नटखट ने क्या पता की आप निकले, अस्तित्व के सांप निकले, हमने बच्चा समझकर छोड़ दिया था, वे हमारे भी बाप निकले, विदिशा के संतोष शर्मा ने मोहब्बत का हंसी मौसम भी बड़ा ही सर्द निकला, जिसे हमदर्द समझते थे वहीं बेदर्द निकला कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं की तालियां बटोरी। भोपाल की नम्रता श्रीवास्तव ने खत कबूतर तो ला रहा था, वह शिकारी का शिकार हो गया, यह अदब की महफिलें यह रतजगी तुमसे मिलने का बहाना हो गया, बैतूल के पीआर पाटनकर ने भ्रष्टाचार की बेल वनस्पति घोटालों की खाद से लोकतंत्र भी जख्मी होता है कविता से नेताओं द्वारा किए गए घोटालों की पोल खोली। प्रभात पट्टन के कवि पुष्पक देशमुख ने औशियों का नाश करने, गीता पढऩे रण क्षेत्र सजाया था तुमने, आंसू बहाते अर्जुन से भी दुदुर्भरों का रक्त बहाया था तुमने कविता से युवाओं में जोश भर दिया। संचालन रायसेन के कवि कौशल सक्सेना ने किया।
मुलताई। कवि सम्मेलन में देर रात तक चला कविताओं का दौर।