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कंडम बसें भी सड़कों पर, खिड़कियों में कांच नहीं

8 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता-!- पेटलावद

कड़ाके की ठंड में जहां लोग घरों से निकलने की हिम्मत नहीं कर पा रहे। वहीं ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में चलने वाली बसों की खिड़कियों में कांच नहीं होने से यात्रियों को ठंडी हवा के थपेड़ों के कारण परेशानी से जूझना पड़ रहा है। हवा के कारण यात्री बीमार हो रहे हैं। विकासखंड मुख्यालय से ग्रामीण क्षेत्रों में जाने वाली अधिकांश बसों में शीशे टूटे होने के बावजूद इन्हें फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है।

मुख्यालय में प्रतिदिन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए करीब सौ से अधिक बसें आती-जाती हैं, लेकिन इन बसों की कंडम स्थिति की ओर आरटीओ का ध्यान नहीं जा रहा है। पेटलावद से बामनिया, बरवेट, थांदला, रतलाम, झकनावदा होते हुए राजगढ़ जाने वाली कई बसों में खिड़कियों में कांच नहीं है।

प्रत्येक यात्री बस में ड्राइवर की सीट के पीछे अग्निशमन यंत्र जरूरी है। इसके अलावा 32 सीटर या इससे अधिक सीट की बसों में दो दरवाजे जरूरी है। बस के आगे कांच पर बस का बीमा, फिटनेस सर्टिफिकेट, किराया सूची चस्पा होना जरूरी है, लेकिन किसी भी बस में इन नियमों का पालन नहीं हो रहा। जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान नहीं है।

बामनिया निवासी सुखराम ने बताया कि पेटलावद से बामनिया जाने वाली जिस बस में वह बैठें थे। उसके पीछे वाली खिड़की में शीशे नहीं थे। इसके कारण पूरे सफर के दौरान उन्हें सर्द हवाएं झेलना पड़ी। बस में उतरते समय उन्हें ऐसा लगा जैसे उनका शरीर सुन्न हो गया है। ऐसी स्थिति में घर पहुंचने के पहले डॉक्टर के पास जाना मुनासिब समझा। इसी तरह ऐसे अनेक यात्री हैं जो बस में शीशे न होने के कारण सर्दी व खासी से पीडि़त हो गए।



पेटलावद. बसों की खिड़कियों में फूटे पड़े हैं कांच।



ये कैसा लोक परिवहन

फिटनेस पर भी नहीं अफसरों का ध्यान, खिड़की में कांच नहीं होने से ठंड में यात्रियों को होती है परेशानी