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हम अपनी ही संस्कृति को भूलते जा रहे हैं

8 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता-!- छकतला

भारतीय संस्कृति सबसे पुरानी व समृद्ध है, यह भारत के विद्वान व मनीषियों ने माना है। आज हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। ग्रामीण समर्थ व परिश्रमी है पर इनमें भोलापन है। हमारे गुरु का उद्देश्य युग निर्माण योजना है।

शांतिकुंज हरिद्वार के वरिष्ठ प्रतिनिधि वीरेश्वर उपाध्याय ने कही। वे मंगलवार को गायत्री परिवार द्वारा छकतला में आयोजित किए गए वनवासी कार्यकर्ता सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। विशेष अतिथि बड़वानी उपजोन के समन्वयक प्रभाकांतजी तिवारी थे। अध्यक्षता झाबुआ, आलीराजपुर के जिला समन्वयक संतोष वर्मा ने की। वीरेश्वर ने कहा हमें संस्कृति क्रांति करना पड़ेगी तभी भारत विश्व गुरु बनेगा। उन्होंने कहा ग्रामीणों के बीच अपनत्व का भाव जगाना होगा। हमारी संस्कृति को जाग्रत करने के लिए हमें हर गांव से राम लक्ष्मण निकालना पड़ेंगे। गायत्री मंत्र यही कहता है कि हमें भगवान से भेद नहीं करना चाहिए हमें अपनी संस्कृति का बोध करना है। वनवासी लोग अपने प्रकृति के बीच व्यस्त, स्वस्थ, व मस्त रहते हैं। इससे पहले ग्राम अट्ठा के प्रवासी युवा अवलसिंहभाई ने परंपरा अनुसार तीर कमान भेंटकर अतिथियों का स्वागत किया। संचालन जोबट शक्तिपीठ के व्यवस्थापक डॉ. शिवनारायण सक्सेना ने किया। आभार छकतला प्रज्ञापीठ के राकेश वाणी ने माना। कार्यक्रम में रामलाल तोमर, बाबूलाल वाघेला, रमणलाल वाणी, भूपेंद्र राठौड़, धनसिंह तोमर, कमलप्रसाद श्रीवास्तव, देवेंद्र भाई, बसंतसिंह किराड़े, ड़ॉ. महेश पाटीदार, ड़ॉ. नरेश पाटीदार, लक्ष्मणभाई, रमेशभाई नरगांवा, राकेश वाणी, रमेश भाई आदि मौजूद थे।



आलीराजपुर.गायत्री परिवार के वनवासी कार्यकर्ता सम्मेलन में मौजूद ग्रामीणजन



छकतला में विशाल वनवासी सम्मेलन में गायत्री परिवार हरिद्वार से आए वीरेश्वर उपाध्याय ने कहा