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अध्यक्ष को मांगना पड़ी माफी सीएमओ बोले- करा दो ट्रांसफर

8 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता - धार
धार में नगर पालिका परिषद की प्रेसीडेंट इन कौंसिल बैठक में बुधवार को हंगामा हो गया। चेक वितरण कार्यक्रम में नहीं बुलाने और हमेशा अनदेखी करने से गुस्साए नपा उपाध्यक्ष और पीआईसी के अन्य सदस्यों ((भाजपा पार्षदों)) ने विरोध कर दिया। सीएमओ को खरी-खोटी सुनाने लगे। इससे उखड़े सीएमओ ने कहा- ऐसा है तो करा दो ट्रांसफर। चला जाऊंगा। बात बढऩे पर नपाध्यक्ष ममता जोशी बीचबचाव करने लगी। नाराज पार्षदों ने उन्हें बीच में नहीं पडऩे की सलाह दी। कार्यक्रम की सूचना नहीं करने पर अध्यक्ष ने फिर भी माफी मांगकर झगड़ा सुलझाने की कोशिश जारी रखी। हालांकि हंगामेदार बैठक के दौरान इस बात पर आरआई के लिए तालियां भी बजाई गई कि नामांतरण की सूची एजेंडे के साथ दे दी थी।
दरअसल, नपा कार्यालय प्रांगण में दो दिनी जनसमस्या निवारण शिविर लगा था। बुधवार को यहां एक योजनांतर्गत लाभान्वित महिलाओं को चेक वितरित करने का कार्यक्रम भी तत्काल जोड़ दिया गया। इसकी सूचना उपाध्यक्ष सहित अन्य भाजपा पार्षदों को नहीं दी गई। सिर्फ अध्यक्ष सहित गिनती के पार्षद मौजूद थे। हालांकि विधायक नीना वर्मा को बतौर अतिथि बुला लिया था। जब अन्य पार्षद दोपहर में होने वाली पीआईसी बैठक में शामिल होने पहुंचे तो उन्हें चेक वितरण हो जाने का पता चला। बैठक शुरू होते ही उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। वे सीधे तौर पर सीएमओ को घेरने लगे और कहा कि हमेशा ही ऐसा होता है। पार्षदों को सम्मान नहीं मिल पाता। जिसका काम होता है, सिर्फ उसे सूचना दे दी जाती है। बाले-बाले ही काम हो रहे हैं। अध्यक्ष को भी चाहिए कि सभी पार्षदों को ऐसे कार्यक्रमों में सूचना दी जाए, ऐसा प्रबंध करें। जब पार्षदों ने इस मुद्दे पर सीएमओ का घेरा तो वे फोन पर बात करते हुए अचानक बाहर चले गए। भारी हंगामा कर पुन: बुलवाया गया तो वे बोले- कलेक्टर साहब का फोन था, यह देख लो। जहां तक चेक वितरण की सूचना का सवाल है। मुझे भी जानकारी नहीं दी गई थी। होती तो बिल्कुल सूचना दे देता। मेरे कर्मचारी से गलती हो गई। इस पर नपाध्यक्ष ने भी कहा कि पार्षदों को सूचना नहीं हो पाई, गलती तो है। अपनी ओर से इसके लिए माफी मांगती हूं। इस पर पार्षदों ने कहा- आप क्यों माफी मांग रही हो।




धमकी मत दो ट्रांसफर की

इस बार उपाध्यक्ष जितेंद्र अग्रवाल बोले- धमकी मत दो ट्रांसफर की। आप नहीं रहोगे तो दूसरा आएगा, दूसरा नहीं तो तीसरा। पार्षद विशाल राठौर ने भी सीएमओ से कहा कि हमने जब सवाल किए तो तुमने नियम बता दिए। बाकी आपका जवाब यह भी नहीं होना चाहिए था कि ट्रांसफर करा दो। काम कराने और विरोध करने के लिए विपक्ष ही गेट पर नहीं बैठ सकता, यह काम हमें भी आता है। एक बारगी तो ऐसा हुआ कि बैठक के बहिष्कार की घोषणा कर दी गई और कहा नामांतरण छोड़कर सभी मुद्दों पर २७ जनवरी को चर्चा करेंगे। हालांकि बाद में बैठक पुन: शुरू हो गई। पार्षदों के अनुसार, ढाई घंटे चली बैठक के दौरान भ्रष्टाचार का मुद्दा छाया रहा। कार्यप्रणाली को लेकर जमकर विरोध किया। बताया कि कोई भी कार्य बगैर टेंडर नहीं किए जाएं। पारदर्शिता लाएं। सीएमओ के करीबी कहे जाने कर्मचारी शीतल तोमर को लिपिक पद पर नियमितिकरण के प्रस्ताव को नपाध्यक्ष ने वकील की राय के लिए भेजने की बात कही।

अध्यक्ष का चेहरा रूआंसा!

प्रत्यक्षदर्शी पार्षदों के अनुसार बैठक में भारी हंगामा और माफी मांगने की नौबत आने पर एक बार तो नपाध्यक्ष की आंखें भर आई थी। रूआंसा चेहरा देख नाराज पार्षदों ने भी तेवर ढीले किए।

जाने लगे तो फिर से रोककर बैठाया

लगातार विरोध देख सीएमओ बघेल उखड़ गए और बैठक कक्ष से यह कहकर जाने लगे कि- ऐसा है तो करा दो ट्रांसफर..। मैं चला जाऊंगा। पार्षद मुरली शर्मा व शिव पटेल ने जैसे-तैसे समझाकर सीएमओ को फिर बैठाया। सीएमओ भी इतने तैश में थे कि विधानसभा से लेकर नपा परिषद के नियम बता दिए। उन्होंने कहा कि आपको कोई समस्या है तो बैठक की सभापति यानी नपाध्यक्ष को बताएं, वे मुझसे या मेरे कर्मचारियों से सवाल कर सकती हैं। अन्य कोई इस तरह सीधे जवाब नहीं मांग सकता। सीएमओ के इस बयान से पार्षदों का पारा और चढ़ गया।