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- घर जा रही हूं... सूचना लिख चली गई शिक्षक, पढ़कर दंग रह गए अफसर
घर जा रही हूं... सूचना लिख चली गई शिक्षक, पढ़कर दंग रह गए अफसर
भास्कर संवाददाता - धार
स्कूलों का शैक्षणिक स्तर जांचने के लिए किए जा रहे अचानक निरीक्षण में अधिकारियों के सामने रोचक किस्से सामने आ रहे हैं। एक अधिकारी शुक्रवार को जब धार के बस स्टैंड स्थित मावि स्कूल पहुंचे तो यहां प्रभारी अनिता पंड्या नदारद थी। शिक्षकों से पूछा तो कहा कि वे घर भोजन करने गई हैं। रिकॉर्ड देखे तो गैरहाजिर शिक्षक शोहदा परवीन का दिलचस्प सूचना पत्र मिला। वे लिखकर गई थी कि आवश्यक कार्य होने से घर जा रही हूं। सूचना श्रीमान की ओर प्रेषित। इतना ही नहीं, प्रअ ने उस पर स्वीकृत भी कर दिया। यह देख अधिकारी झल्ला उठे और कहा कि ये कोई अवकाश का आवेदन नहीं है, यह तो जैसे सूचना दी जा रही है कि मुझे घर काम है, जा रही हूं। ये हाल है शहर में। स्कूल में उपस्थिति का हाल और बुरा था। यहां 70 बच्चे दर्ज हैं, मिले सिर्फ सात। स्टाफ पर कार्रवाई होगी।
पढ़ाने के बजाय कमरे में बैठी थीं दोनों शिक्षक
प्रावि क्रमांक 5 गांधी कॉलोनी में पढ़ाई के बजाय प्रअ सुशीला बौरासी और कीर्ति बिल्लौरे एक कमरे में बैठी थी, तीसरी शोभा चौहान अवकाश पर थी। दर्ज 97 में से सिर्फ 13 बच्चे थे जिन्हें पढ़ाया नहीं जा रहा था। आजाक एसी नीलेश रघुवंशी ने उपस्थिति रजिस्टर चेक किया तो बच्चों की उपस्थिति दर्ज नहीं मिली। कारण पूछा तो कहा कि अधिकतर बच्चे नमाज के लिए गए हैं, कहें तो बुलवा लाती हूं। एसी ने मना किया और उपस्थित 13 बच्चों से ही शैक्षणिक सवाल पूछे लेकिन बच्चे सही जवाब नहीं दे पाए। अधिकारी ने दोनों शिक्षकों का वेतन काटने और कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रावि मगजपुरा से दौरे की शुरुआत हुई थी जहां शिक्षण स्तर अत्यंत निम्न था। शाला प्रभारी को सुधार के लिए 10 दिन की मोहलत दी गई। प्रावि एलआईजी कॉलोनी शैक्षणिक स्तर ठीक मिला। पहली व दूसरी में अक्षर ज्ञान के जोर देने का कहा।
पाडल्या में लगाई फटकार, पूरे स्टाफ को नोटिस
अधिकारी जब पास के गांव पाडल्या के साथ में संचालित प्रावि व मावि गए तो पहली से आठवीं तक के बच्चों का शैक्षणिक स्तर अत्यंत दयनीय मिला। अधिकारी ने जमकर फटकारा और पूरे स्टाफ को असंचयी प्रभाव से एक-एक वेतन वृद्धि रोकने के लिए नोटिस जारी कर दिए गए। डोकरीया होद स्कूल में ताला था। टीचर चार बजे ही जा चुके थे। छोटा उमरिया आश्रम में 45 बच्चे थे लेकिन संविदा अधीक्षक मोहम्मद शाहिद खान नदारद थे। प्रावि व मावि दिलावरा में बच्चों के अंग्रेजी, गणित, हिंदी के ज्ञान से अफसर खुश हुए।
शहर के स्कूलों में शैक्षणिक हालात खराब - कहीं 97 में से 13 तो कहीं 70 में सिर्फ सात बच्चे मिले