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जिले में घूम रहे कई तेंदुए, रीछ की पुष्टि नहीं

7 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता - धार
जिले में अभी भी भारी संख्या में वन्यप्राणी जंगलों में हैं। पदचिह्न सहित अन्य मापदंडों के जरिए इनकी गणना पूरी कर ली गई। जिले के वन में सबसे खतरनाक मांसाहारी जीव तेंदुआ ही है जिसके पदचिह्न और अन्य साक्ष्य धार, मांडू, धामनोद, सरदारपुर और टांडा रेंज में मिले हैं। नीलगाय, सियार, लोमड़ी, खरगोश, बंदर भी बड़ी संख्या में मिले हैं। रेंजवार आंकड़े एकत्रित करने के बाद अब वनविभाग उनका मिलान कर रहा है। इसमें विशेषकर तेंदुए के मामले में एक-दूसरे से लगी रेंज के आंकड़ों को क्रॉस चेक किया जाएगा। पदचिह्नों का भी मिलान होगा, उसके बाद ही अंतिम स्पष्ट हो पाएगी कि तेंदुए कितने हैं। वनविभाग के रेंज अधिकारियों का दावा है कि वन्यजीवों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। उधर, पिछले दिनों गंधवानी रेंज के आमघाटा में रीछ देखे जाने की सूचना भी वन विभाग को मिली थी। इसके चलते रेंज एरिया में उसके निशानों की भी तलाश की लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट में रीछ की उपलब्धता के कोई निशान नहीं मिले हैं। इसकी पुष्टि रेंजर टांडा ने की है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार धार रेंज के नीमखेड़ा, बरखेड़ा, उमरिया, शिकारपुरा, मांडू रेंज के जंगलों में, धामनोद रेंज के तारापुर घाट, ब्राह्मणपुरी में जबकि सरदारपुर में अमझेरा तरफ भी तेंदुए के निशान मिले हैं। मुख्य बात यह है कि धार और मांडू रेंज लगी हुई है और इन दोनों में ही चार-चार तेंदुओं की उपलब्धता के संकेत मिले हैं। अब विभाग मिलान के बाद ही स्पष्ट कर पाएगा कि अधिकृत संख्या क्या है। बाग और कुक्षी रेंज में तेंदुए के निशान नहीं मिले हैं।



मिलान के बाद मिलेगा आंकड़ा

डीएफओ डीके पालीवाल ने बताया जिले में वन्यप्राणियों की गणना पूर्ण हो चुकी है। आंकड़ों का एकत्रीकरण व मिलान के बाद ही अंतिम स्थिति दे पाएंगे। कारण, रेंज एक-दूसरे से लगी हुई है, ऐसे में तेंदुआ जैसे प्राणियों का राउंड एरिया अधिक होता है, वे एक से दूसरी रेंज में आते-जाते रहते हैं। ऐसे में फुट मार्क मिलाने के बाद ही गणना के स्पष्ट आंकड़े जारी करेंगे।

पेड़ पर चढ़े अजगर को तना काटकर गिराया, फिर बाग-टांडा जंगल में छोड़ा

धार - वन विभाग की कुक्षी रेंज के गिरवान्या में मंगलवार को भारी-भरकम अजगर ने खौफ पैदा कर दिया। गांव में कौतुहल के बाद विभागीय अधिकारी पहुंचे। हालांकि करीब 18 किग्रा का अजगर बबूल के पेड़ पर चढ़कर लिपट चुका था। उसकी फूंफकार के डर से वनकर्मियों की भी हिम्मत नहीं हो पा रही थी।

आखिरकार पेड़ का तना काटकर अजगर को नीचे

गिराया गया, उसके बाद उसे बांधकर थैले में भर लिया। रेंजर भूरसिंह रावत ने बताया अजगर काफी वजनी था, उसे टांडा-बाग के जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया है।

वन्यप्राणी गणना - जिले में नीलगाय, भेडि़ए, सियार बड़ी संख्या में, खरगोश, अजगर व बंदर भी हैं