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सरस्वती विद्या मंदिर में हुए कार्यक्रम में विमल अग्रवाल ने कहा

7 वर्ष पहले
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देवास - भारत को सोने की चिडिय़ा इसलिए नहीं कहा जाता था कि यहां सोने के भंडार थे बल्कि इसलिए कि प्राचीन भारत में ज्ञान के भंडार थे। यहां के लोग दुनिया के लोगों से अधिक ज्ञानवान, चरित्रवान थे। चरित्र रूपी स्वर्ण भंडारों के कारण ही देश को सोने की चीडिय़ा कहा जाता था। अपने चरित्र व ज्ञान के बल पर ही देश विश्व गुरु के पद पर सुशोभित था। यह बात विजयनगर सरस्वती शिशु मंदिर में हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विद्यालय संचालन समिति सचिव विमल अग्रवाल ने कही। अध्यक्षता समिति अध्यक्ष कैलाश रघुवंशी ने की। प्राचार्य राजेश त्रिवेदी ने अतिथियों का परिचय कराते हुए स्वागत किया।
वार्षिकोत्सव में दी रंगारंग प्रस्तुति
सरस्वती ज्ञापनीठ उमावि में वार्षिक उत्सव अभिव्यक्ति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि जीडीसी प्राचार्य डॉ. अशोक वाजपेयी थे। अध्यक्षता अमरजीतसिंह खनूजा ने की। छात्र-छात्राओं ने रंगारंग कथक, लावणी एवं राजस्थानी नृत्य की प्रस्तुति दी। संगीत संयोजन यंग मेलोडियन के मुश्ताक अली ने दिया। संचालक प्रेमनाथ तिवारी, प्रचार्य सुषमा निगम आदि उपस्थित थे।