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टंकियों के निर्माण में देरी के लिए नपा अधिकारी जिम्मेदार!
भास्कर संवाददाता - धार
शहर में 25 करोड़ रुपए की दिलावरा जलावर्धन योजना का काम निर्धारित समय अपै्रल 2014 में पूरा हो पाएगा, इस पर संदेह के बादल मंडराने लगे है। पुणे की ठेका कंपनी तेजस को भी यह एहसास हो रहा है। भविष्य में निकाय से विवाद, भुगतान रुकने और पैनल्टी से बचाव के लिए कंपनी ने अपना ‘दांव’ चल दिया है लेकिन नगर पालिका इससे अनजान और बेफ्रिक है। कंपनी ने नगर पालिका को बेहद डिप्लोमेटीक ((व्यवहार कुशलता/कूटनीतिक)) अंदाज में एक चिट्ठी भेज दी है। अफसरों पर दबाव बनाने की कोशिश की है और टंकियों के निर्माण में देरी के लिए निकाय के अधिकारी को जिम्मेदार ठहरा दिया है।
पत्र में बताया है कि योजनांतर्गत टंकियों की जगह पहले चयन कर ली गई थी। जब खुदाई शुरू की गई तो स्थानीय अधिकारी ((किसी का नाम/पदनाम नहीं)) ने धारेश्वर टंकी और पौ चौपाटी का काम रुकवा दिया। धारेश्वर टंकी के लिए 50 फीसदी तक खुदाई पूरी हो गई थी। नालछा दरवाजा वाली टंकी की जगह भी 50 प्रश खुदाई होने के बाद बदली गई।
मतलबपुरा की टंकी की खुदाई का काम 20 प्रश हो गया था, बाद में वहां भी जगह का मसला आ गया है। कंपनी ने कह दिया है कि निर्माण कार्य में अवरोध बन रहे मामलों को सुलझाया जाएं ताकि समय में पूरा काम कर सके।
॥भोपाल से लौट रहा हूं, पत्र की जानकारी नहीं है। वैसे ठेका कंपनी ऐसा कैसे कह सकती है कि निकाय अधिकारी ने काम रुकवाया है। धारेश्वर टंकी में पानी होने से खुदाई उसी ने रोकी थी, सबइंजीनियर खुद यह बात कह चुके हैं। शुक्रवार को आते ही इस मामले में कंपनी से जवाब तलब किया जाएगा। निकाय को नुकसान नहीं होने देंगे, काम समय पर पूरा करवाएंगे।ø
जीएस बघेल, सीएमओ
धारेश्वर टंकी के लिए पीएचई परिसर में खुदाई की गई थी। काम भी बंद पड़ा है।
काम में देरी व बचाव के लिए कंपनी का दांव
कंपनी ने अपनी बातें बड़ी सफाई से लिखी हैं ताकि निकाय अधिकारियों से मधुर संबंध खराब न हो। इसी वजह से पत्र में काम रुकवाने के लिए जिम्मेदार किसी अधिकारी का नाम नहीं लिखा है जबकि निकाय में निर्माण व योजना से जुड़े गिनती के दो अधिकारी हैं। पहले सीएमओ, दूसरे सब-इंजीनियर। दूसरी बात यह है कि धारेश्वर क्षेत्र में पीएचई प्रांगण में टंकी निर्माण में देरी के लिए कंपनी का बचाव सब-इंजीनियर खुद कर रहे थे कि दो फीट पर पानी आ गया, फरवरी से काम शुरू हो जाएगा। अब सवाल यह है कि कंपनी खुद ही निकाय को देरी और काम रुकवाने के लिए जवाबदार ठहरा रही है तो सब-इंजीनियर उसका बचाव क्यों कर रहे हैं?
कंपनी बच जाएगी, सरकार पर पड़ेगा बोझ!
इस लिखा-पढ़ी के बाद निकाय ने जल्द स्टैंड नहीं लिया तो भविष्य के लिए निकाय के पाले से गेंद निकल जाएगी। कारण, काम में देरी होने पर कंपनी पैनल्टी से साफ बच जाएगी कि देरी के लिए हम नहीं निकाय जिम्मेदार है। यह रहा सबूत ((पत्र))। दूसरी ओर निकाय इस योजना को पूरा करने के लिए करोड़ों रुपए का लोन हुडको भोपाल से ले रहा है। यह राशि उसे एक-दो हफ्ते में मिल जाएगी। ऐसे में ब्याज का बोझ सरकार पर पड़ेगा।
> २५ करोड़ है योजना की लागत
> ८ टंकियां बननी है शहर में
> 3 टंकियों का निर्माण उलझन में
> २०१४ अपै्रल में पूरी होनी है योजना
दिलावरा जलावर्धन योजना
अप्रैल २०१४ तक कैसे पूरा होगा काम - निर्माण कंपनी ने गुपचुप तरीके से निकाय को लिखे पत्र में कहा समय पर काम पूरा कराने के लिए जल्द से जल्द दूर करें अवरोध