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जिला अस्पताल में डायलिसिस सेंटर के लिए पुराने आई वॉर्ड का किया चयन
भास्कर संवाददाता - देवास
जिला अस्पताल में डायलिसिस सेंटर शुरू करने के लिए बना बनाया पुराना सेटअप छोड़कर नया सेटअप डालने की तैयारी की जा रही है। नया सेटअप तैयार होने के बाद ही जिला अस्पताल प्रबंधन डायलिसिस सेंटर प्रारंभ करने के लिए मशीनें बुलवाएगा और नया सेटअप स्थापित करने को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट
ही नहीं है।
जिला अस्पताल में पूर्व में भंडारी हॉस्पिटल द्वारा आईसीयू संचालित किया जा रहा था। बाद में उसकी लीज खत्म हुई और संचालन जिला अस्पताल प्रबंधन ने अपने हाथ में ले लिया। एसएनसीयू का नया सेटअप बनने से आईसीयू का एक हिस्सा खाली हो गया है। जिसमें पार्टीशन से लेकर सेंट्रल ऑक्सीजन लाइन आदि की व्यवस्था है। वर्तमान में इस भवन का उपयोग ब्लड व यूरीन की जांच के लिए किया जा रहा है। इतने अच्छे सेटअप में पैथोलॉजी संचालित की जा रही है और पुराने आई वार्ड का जीर्णोद्धार कर वहां डायलिसिस सेंटर शुरू करने का प्रयास हो रहा है। जबकि पैथोलॉजी पुराने स्थान पर चल सकती है और वर्तमान पैथोलॉजी के सेटअप को डायलिसिस सेंटर के रूप में उपयोग कर सकते हैं। यह ठीक आईसीयू से सटा हुआ है इसलिए डायलिसिस के दौरान गंभीर स्थिति बनने पर आईसीयू में शिफ्ट करने में भी आसानी होगी।
अब जगी सेंटर शुरू
होने की उम्मीद
एक वर्ष पूर्व शासन ने डायलिसिस सेंटर स्वीकृत किया था लेकिन अब तक प्रबंधन की अरुचि की वजह से काम में गति नहीं आई थी लेकिन अब इसके शुरू होने की उम्मीद दिखाई दे रही है। सेंटर के लिए मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष सहित पूरी टीम ने 15 दिवसीय प्रशिक्षण ले लिया है। वे बस यह राह देख रहे हैं कि कब सेंटर शुरू हो और वे उन लोगों की परेशानी को कुछ हद तक कम कर सकें जिन्हें डायलिसिस के लिए इंदौर-उज्जैन जाना पड़ता है। यह सेंटर शुरू होने से जहां आने-जाने का समय बचेगा वहीं प्रति डायलिसिस में होने वाला करीब 1500 से 2000 रुपए का खर्च भी बचेगा।
रेनबैक्सी लेबोरेटरीज से
मांगा सहयोग
डायलिसिस सेंटर स्थापित करने के लिए मशीनें शासनस्तर से भेजी जाएगी जबकि सेंटर के लिए चयनित जगह रेनोवेट करने में रेनबैक्सी लेबोरेटरीज से सहयोग मांगा गया है। हालांकि अब तक रेनबैक्सी ने इसके लिए किसी तरह की पहल नहीं की है। ऐसे में यह संभव है कि रिनोवेशनन का काम जल्द नहीं होगा और सेंटर शुरू होने में कुछ समय लग
सकता है।
इनका यह कहना है
॥ हमारे पास रिनोवेशन का प्रस्ताव आया है। फिलहाल इस संबंध में हमने कोई कमिटमेंट नहीं किया है।ञ्जञ्ज
विवेक भार्गव, एचआर डिपार्टमेंट रेनबैक्सी लेबोरेटरीज देवास।
॥आरओ सिस्टम आ चुका है। रेनबैक्सी की मदद से पुराने आई वार्ड को रेनोवेट करेंगे। रेनोवेट होते ही मशीनें बुलवाकर सेंटर शुरू कर दिया जाएगा।ञ्जञ्ज
-डॉ. विद्या वेल्हणकर, सिविल सर्जन जिला अस्पताल देवास।
बना बनाया सेट-अप छोड़कर नए सेट-अप की तैयारी