सरकारी स्कूलों की होगी जीआईएस मैपिंग
ञ्चगूगल मेप और एनआईसी से लिंक की जाएगी सभी स्कूलों की जानकारी
भास्कर संवाददाता - बुरहानपुर
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के मानकों को पूरा करने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने सरकारी स्कूलों के जीआईएस मैपिंग करने का निर्णय लिया है। प्रारंभिक चरण में भोपाल और सिंगरौली जिले में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है। एनआईसी के सहयोग से राज्य शिक्षा केंद्र ने मोबाइल एप तैयार किया है। जिले से एकत्रित डाटा गूगल मेप और एनआईसी के जीआईएस सिस्टम से लिंक किया जाएगा। राज्य शिक्षा केंद्र ने मोबाइल एप्लिकेशन ((एप)) तैयार किया है। इसे जीपीएस कैमरे की सुविधा के साथ एंड्रायड वर्जन 2.3.0 और हायर फोन पर लोड किया जाएगा। एप्लिकेशन के माध्यम से सरकारी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के मानक जैसे भवन, उपलब्ध कमरे, प्रधान पाठक कक्ष, रैम्प, बालक-बालिका सुविधाघर, पेयजल की स्थिति, किचन शेड, खेल का मैदान, बाउंड्रीवॉल की स्थिति का पता लगाया जाएगा।
पता चलेगी सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति
एजुकेशन पोर्टल पर लोड की जाएगी सारी जानकारी
जिला शिक्षा केंद्र के सहायक यंत्री, उपयंत्री जीपीएस टैग से वर्तमान स्थिति का फोटोग्राफ लेंगे। इसकी जानकारी एजुकेशन पोर्टल पर डाली जाएगी। यह जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध डाटा से लिंक हो जाएगी। राज्य शिक्षा केंद्र की ओर से सहायक यंत्री, उपयंत्रियों को हैंडसेट भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
॥जीआईएस मैपिंग से सरकारी स्कूलों में शिक्षा के अधिनियम के मानकों की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा। जिले में भी यह योजना लागू होना है।
आरएल उपाध्याय, डीईओ, बुरहानपुर
> राज्य शिक्षा केंद्र ने हर जिले के सहायक यंत्री, उपयंत्रियों को दिसंबर में ट्रेनिंग दी है।
> पायलट प्रोजेक्ट सफल होने पर बुरहानपुर जिले में भी जीआईएस मैपिंग का काम होगा।
> सरकारी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सुविधाएं जुटाने में आसानी होगी।
> निर्धारित मापदंड के अनुसार शिक्षक, कमरे, खेल मैदान की उपलब्धता होगी।
यह किया विभाग ने
यह होगा फायदा
ऐसे करेंगे काम
> सहायक यंत्री, उपयंत्री स्कूल भवन और यहां पढऩे वाले बच्चों के जीआईएस हैंडसेट से फोटो लेंगे।
> जिन संस्थाओं में मानकों का पालन नहीं हो रहा है उन पर राज्य शिक्षा केंद्र नजर रखेगा।
आरटीई मानकों को पूरा करने के लिए जानी जाएगी स्कूलों की स्थिति राज्य शिक्षा केंद्र ने एआईसी के सहयोग से तैयार किया मोबाइल एप