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परमात्मा को पाने के लिए अभिमान का त्याग जरूरी

7 वर्ष पहले
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रतलाम. परमात्मा को पाने के लिए अभिमान का त्यागना जरूरी है। धर्म की शरण में जाने से अभिमान हटता है। आत्म कल्याण और परमात्मा की प्राप्ति के लिए धर्म का सान्निध्य होना चाहिए। धन दान करने से मन शुद्ध होता है। दानी कभी अभिमानी नहीं होता। यह बात इंद्रलोक नगर में आयोजित रामकथा में पं. योगेश्वर शास्त्री ने कही। उन्होंने कहा व्यक्ति जिस रूप में परमात्मा की आराधना करता है, प्रभु उसी रूप में उसके दु:खों का नाश करते हैं। दान से धन शुद्ध होता है। धन की शुद्धि से मन शुद्ध होता है। आयोजन समिति अध्यक्ष किशन दरयानी ने रामचरित मानस का पूजन किया। बुधवार शाम 7 बजे सुंदरकांड होगा। 30 जनवरी सुबह 8 बजे पं. मृदुल कृष्ण शास्त्री के आचार्यत्व में हवन होगा। 11 बजे भंडारा होगा। फोटो में कथा में राम, जानकी, लक्ष्मण व हनुमान का रूप धरे बच्चे व मौजूद श्रद्धालु।