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‘जो सर्टिफिकेट के लिए आए हैं वे भोजन-नाश्ता कर जा सकते हैं’

7 वर्ष पहले
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ञ्चकॉमर्स कॉलेज में ‘वाणिज्य में अनुसंधान’ पर दो दिनी कार्यशाला
सिटी रिपोर्टर - रतलाम
जो शोध की बारीकियां जानना चाहते हैं वे सुने। जिज्ञासा शांत करें। समापन सत्र में सवाल भी करें। हम जवाब देंगे। जो सर्टिफिकेट लेने आए हैं वे भोजन-नाश्ता कर जा सकते हैं। मोहनलाल सुखाडिय़ा यूनिवर्सिटी में डिपार्टमेंट ऑफ एकाउंटेंसी एंड स्टैटिक्स के प्रोफेसर जी. सोरल ने यह कहकर कार्यशाला को चरम पर पहुंचाया।
मौका था कॉमर्स कॉलेज में गुरुवार को ‘वाणिज्य में अनुसंधान’ कार्यशाला का। इसमें मोहनलाल सुखाडिय़ा यूनिवर्सिटी उदयपुर, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी यूनिवर्सिटी भोपाल, जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर, देवी अहिल्या विश्व विद्यालय इंदौर के सदस्यों ने मार्गदर्शन दिया।
कॉपी-पेस्ट कर किए शोध कभी सफल नहीं होते- अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी यूनिवर्सिटी भोपाल के कुलपति प्रो. मोहनलाल छीपा ने कार्यशाला में कहा हमें हिंदी में वाणिज्य शोध आगे बढ़ाना है। वर्तमान में कई व्यक्ति मेहनत नहीं करना चाहते। वे सीधे इंटरनेट पर जाकर कॉपी-पेस्ट कर आलेख तैयार कर रहा है। ऐसे आलेखों से तैयार शोधों को विशेषज्ञ असफल कर रहे हैं। कुछ सफल हो जाते हैं तो वे कम्प्यूटर में कचरा बढ़ाने के समान हैं। छीपा ने कहा वाणिज्य व अर्थशास्त्र का शोध हिंदी होने लगा है। इंटरनेट पर कई आलेख हिंदी में देख सकते हैं। हिंदी में शोध मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं।
आज समापन - कार्यशाला का समापन शुक्रवार को होगा। इसमें विक्रम विवि के प्रो. बी.एस. मक्कड़, प्रो. शैलेंद्र भारल, आर्ट एंड साइंस कॉलेज के प्रो. वी. शास्त्री, जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर के प्रो. उमेश होलानी, प्रो. नवीता नाथानी तथा डॉ. गरिमा माथुर संबोधित करेंगी।



ई-व्यूज करेगा मदद

प्रो. सोरल ने बताया फाइनेंस के क्षेत्र में शोध करने वालों के लिए ई-व्यूज सॉफ्टवेयर आया है। हाई क्वालिटी के इस सॉफ्टवेयर का उपयोग करें। कॉलेज प्राचार्य डॉ. एस.के. जोशी, विक्रम यूनिवर्सिटी उज्जैन के प्रोफेसर रामेश्वर सोनी, महेश्वर कॉलेज के प्रो. जे.सी. पोरवाल, आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज इंदौर के प्रो. अनूप व्यास, प्रो. वी. शास्त्री, प्रो. इंद्रेश मंगल, प्रो. विनोदकुमार शर्मा, कार्यशाला संयोजक डॉ. अभय पाठक, संगठन सचिव डॉ. लक्ष्मण परवाल मौजूद थे।

कचरे का भी रिजल्ट देगा कम्प्यूटर

जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर कॉमर्स डिपार्टमेंट के हेड प्रो. उमेश होलानी ने कहा कोई भी शतप्रतिशत शोध का दावा नहीं कर सकता। यह कार्यशाला है सेमिनार नहीं। कितने ही शोध ऐसे हैं जो सुने या पढ़े बिना अपलोड हो जाते हैं। समस्या जानने का प्रयास करना ही शोध का हिस्सा है।

कार्यशाला में उपस्थित प्रोफेसर व विद्यार्थी। इनसेट: कार्यशाला को संबोधित करते प्रो. छीपा।