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कैग की टीम ने बीएमसी की फाइलें खंगाली

8 वर्ष पहले
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चैतन्य सोनी-!- सागर
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में मशीनों व उपकरणों के बगैर इंस्टॉलेशन रिपोर्ट लिए संबंधित कंपनियों को तीन करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान करने के मामले में ग्वालियर महालेखाकार ((कैग)) की दो सदस्यीय टीम जांच करने मंगलवार को बीएमसी पहुंची।
महालेखाकार ग्वालियर से दो सदस्यीय टीम में शामिल अधिकारी मंगलवार को दिन भर जांच-पड़ताल करते रहे। सुबह करीब 11 बजे दोनों अधिकारी कॉलेज प्रबंधन के अधिकारियों के साथ बीएमसी अस्पताल पहुंचे और विभिन्न विभागों सहित कैजुअल्टी ओटी में मशीनों के इंस्टॉलेशन से संबंधित जानकारी ली। इसके बाद डीन कार्यालय के कांफ्रेंस हाल में दिन भर फाइलें खंगालते रहे। अधिकारियों ने उन्हें कॉलेज अस्पताल में स्थापित हो चुकी मशीनों की मैकेनिकल व फंक्शनल इंस्टॉलेशन रिपोर्ट से संबंधित फाइलों का परीक्षण किया।




बीएमसी के ऑडिट के दौरान पूर्व में ग्वालियर की ऑडिट टीम ने बीएमसी अस्पताल में लाखों की लागत से खरीदी गई मशीनों के बगैर इंस्टॉलेशन कराए संबंधित कंपनियों को 3 करोड़ 18 लाख रुपए से अधिक का भुगतान करने के मामले में आपत्ति लेते हुए महालेखाकार ने सीएजी दिल्ली को पत्र भेजा था। सीएजी ने मप्र शासन को पत्र भेजकर इस संबंध में आपत्ति जताई थी। अक्टूबर 2013 में चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव अजय तिर्की ने बीएमसी को पत्र भेजकर मामले जवाब मांगा था। इसके बाद प्रबंधन ने आनन-फानन में संबंधित विभागाध्यक्ष व अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि जल्द से जल्द मशीनें व उपकरण जिन कंपनियों से खरीदे हैं, उनके इंजीनियरों को बुलाकर इंस्टॉल कराकर रिपोर्ट ली जाए। पिछले दो महीने से अस्पताल प्रशासन इस प्रयास में जुटा था।

हाउसिंग बोर्ड को भुगतान की जानकारी मांगी

बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक महालेखाकर ग्वालियर की टीम ने अस्पताल में मशीनों व उपकरणों के भौतिक सत्यापन के बाद बारीकी से संबंधित फाइलों और रिपोर्टों का परीक्षण किया है। इसके अलावा टीम ने बीएमसी निर्माण के दौरान हाउसिंग बोर्ड को किए गए भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी जुटाई। अधिकारियों ने ऑडिट टीम को बताया कि हाउसिंग बोर्ड को सीधे शासन स्तर से भुगतान किया जाता है। सूचना के लिए बीएमसी को पत्र भेजकर जानकारी दी जाती है। कॉलेज प्रबंधन ने टीम के सामने भोपाल से आए भुगतान संबंधित प्रस्तुत किए हैं।

इन मशीनों की नहीं थी इंस्टॉलेशन रिपोर्ट

बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक कॉलेज में वर्ष 2009-10 से अब तक एक्स-रे मशीनें, डायलैसिस मशीनें, सोनोग्राफी मशीनें, आटोक्लेब्ज मशीनें, मॉनीटर, एयर फिल्टर, एयर फ्रेशनर, उपकरण साफ करने का साल्यूशन, ईएनटी स्कोप सहित करोड़ों की लागत से खरीदी गई मशीनें और पलंग सहित अन्य छोटे-बढ़े मेडिकल उपकरण शामिल हैं। इनमें से अधिकांश मशीनें विभाग चालू न होने के कारण स्टोर में डिब्बों में बंद थे। कुछ मशीनों को अधिकारियों ने विभागों में तो रखवा दिया था, किंतु उन्हें तकनीकी रूप से इंस्टॉल नहीं किया गया था।

यह है मामला