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ठगी के मास्टर माइंड को विरोध के बीच झारखंड से पकड़कर सागर लाई पुलिस

8 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - सागर
एसएमएस व कॉल करके भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फांसने वाले रैकेट के मास्टर माइंड प्रवीर मुखर्जी को पुलिस झारखंड के बोकारो से गिरफ्तार करके ले आई है। बुधवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस को वहां के लोगों का विरोध भी झेलना पड़ा। पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उसे सागर लाया जा सका। उसका साथी चंद्रमोहन महीने भर पहले ही पद्माकर पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद से जेल में है। तीसरा आरोपी बोकारो से भागने में सफल हो गया। सागर के पद्माकर थाने के एसआई हेमंत बाबरिया ने बताया कि बोकारो सिटी के चास इलाके का रहने वाला प्रवर मुखर्जी इस गिरोह का मुख्य कर्ताधर्ता है। वह रांची में प्राइवेट जॉब करता है। चंद्रकुमार से एटीएम व एकाउंट नंबर लेकर उसी ने रजाखेड़ी के शंकरगढ़ इलाके के रहने वाले गार्ड माधव अहिरवार से खाते में रुपए डलवाए थे। बुधवार को ठगी के मास्टर माइंड मुखर्जी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। यहां बता दें कि माधव ने दो फिल्म अभिनेताओं की फोटो की पहचान करके मोबाइल नंबर 09955955078 पर बात की थी। दूसरे दिन ही माधव के मोबाइल पर 9661123838 नंबर से कॉल आया। उसने कहा कि आपको ड्रॉ में टाटा सफारी गाड़ी खुली है। आप गाड़ी लेंगे या रुपए। माधव ने गाड़ी चुनी थी। इसके बाद जालसाजों ने उससे करीब 60 हजार रुपए अपने खाते में डलवा लिए थे। एसआई बाबरिया ने बताया कि चंद्रकुमार व प्रवीर मुखर्जी की गिरफ्तारी की जानकारी लगने के बाद कई लोग थाने आए। उनका कहना था कि इन दोनों नाम के व्यक्तियों ने उनसे जालसाजी कर खाते में रुपए डलवाए हैं। पुलिस जांच कर रही है।



आसान नहीं थी गिरफ्तारी

कड़ाके की सर्दी में एसआई हेमंत बाबरिया के नेतृत्व में ५ सदस्यीय टीम १९ जनवरी को ट्रेन से रवाना हुई थी। बाबरिया ने बताया कि १० बजे कटनी से रांची एक्सप्रेस से बोकारो रवाना हुए। अगले दिन सुबह ५ बजे बोकारो स्टील सिटी पहुंचे। उस वक्त जबर्दस्त ठंड व कोहरा था। हम टैक्सी पकड़कर सीधे १७-१८ किमी दूर चास के लिए रवाना हुए। हम सीधे थाने पहुंचे। ९.३० बजे तक थाने में फोर्स वगैरह आ गई और बाकी तैयारियां की गई। एक पुलिस वाले को भेजकर पता लगाया कि मास्टर माइंड प्रवर मुखर्जी का घर कहा है? पता चलते ही हम पांच लोग, चास थाने के एक एएसआई व दो सिपाई पुलिस गाड़ी से कृष्णानगर कॉलोनी स्थित आरोपी के घर पहुंचे। लोकल पुलिस बाहर खड़ी रही, हम लोग सीधे आरोपी के घर में दाखिल हुए। प्रवर उस समय बरमूडा व टीशर्ट में फ्रेस होने जा रहा था। हमने उसे जाते ही पकड़ लिया। हम बाहर निकले तो कई लोग हमें रोकने लगे- कहां ले जा रहे हो? हल्की धक्का मुक्की भी हुई, लेकिन हमने आरोपी को सीधे गाड़ी में खींचा और थाने आ गए। कुछ देर में ही बाद थाने के सामने लोगों की भीड़ जमा हो गई। इनमें कुछ नेता भी थे। आरोपी को छोडऩे के लिए दबाव डाला जा रहा था। सागर से एडिशनल एसपी डीआर तेनीवार ने वहां के एसपी से बात की, तब जाकर आरोपी को सागर तक लाया जा सका। मुखर्जी की गिरफ्तारी के दौरान हुए हंगामे के कारण तीसरा आरोपी चंदन वहां से भागने में सफल हो गया। टीम में एएसआई एमपी तिवारी, हवलदार तुलसीराम, आरक्षक प्यारे व मनीष शामिल थे।



आसान से चेहरे दिखाकर फांसते थे।

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