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महिला विकास के विविध आयाम पर राष्ट्रीय संगोष्ठी
नगर संवाददाता - सागर
एक्सीलेंस कॉलेज में गुरुवार को महिला विकास के विविध आयाम पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। तीन सत्रों में हुई संगोष्ठी में महिलाओं की दशा और दिशा पर विचार रखे गए। इस मौके पर शोध ग्रंथ का विमोचन किया गया। आईएसबीएन से मान्यता प्राप्त इस शोध ग्रंथ में हिंदी के 48 एवं अंग्रेजी के 20 महत्वपूर्ण शोध लेख प्रकाशित किए गए हैं। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक डॉ. सीडी आठ्या ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं के लिए काफी काम हुए हैं। विषय प्रवर्तक प्रो. कुसुम माथुर ने वर्ष 1950 से 2012 तक के स्त्री शिक्षा स्वास्थ्य एवं रोजगार के आंकड़े प्रस्तुत किए। विशिष्ट अतिथि निधि जैन ने कहा कि आज तलवार और कलम के बाद महिलाओं की ताकत महत्वपूर्ण हो गई है। विकास के सूत्र महिला के हाथ में ही हैं। कलाविद् विष्णु पाठक ने कहा कि समाज में महिला दिशा-निर्देशिका है। अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. जेपीएन पांडेय ने की। इस अवसर पर डॉ. कुसुम माथुर भोपाल, डॉ. नीरा सहाय, डॉ. प्रेमकुमार चतुर्वेदी, अर्चना वर्मा, प्रो. एके
पटैरिया, प्रो. रेणुबाला शर्मा, प्रो. नवीन गिडियन, प्रो. आलोक सहाय, प्रो. एसएल साहू आदि मौजूद थे। संचालन संगोष्ठी सचिव डॉ. पदमा आचार्य ने किया। सह सचिव डॉ. संजय खरे ने आभार माना।
संगोष्ठी का प्रथम सत्र
साहित्यकार डॉ. सुरेश आचार्य ने भारतीय संस्कृति में महिला अस्मिता एवं विकास पर चर्चा की। चेयरपर्सन का दायित्व डॉ. रंजना मिश्रा ने निभाया। इसमें डॉ. सरोज गुप्ता, डॉ. आरके चौकसे नरसिंहपुर, डॉ. रेखा बख्शी, प्रिया सिंधी आदि ने शोध आलेख प्रस्तुत किए। संचालन डॉ. अंजना चतुर्वेदी ने किया। आभार डॉ. इला तिवारी ने माना। डॉ. सुनीता सिंह, डॉ. प्रतिमा खरे, डॉ. अंजना नेमा, डॉ. रजनी दुबे के निर्देशन में पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी का द्वितीय सत्र
इस सत्र की अध्यक्षता शासकीय महाविद्यालय खुरई के प्राचार्य डॉ. वीके चित्तले ने की। विषय विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा पांडेय ने महिलाओं के शिक्षा के अभाव में जोखिम और संभावनाओं के आंकड़ों पर प्रकाश डाला। महिला चिकित्सक डॉ. ज्योति चौहान व प्रो. आभा गोयल सतना, डॉ. पूर्वा जैन ने विचार रखे। वहीं प्रकाश दुबे, डॉ. अर्चना भार्गव, डॉ. संजय शर्मा, डॉ. आनंद तिवारी ने शोध पत्र का वाचन किया। संचालन डॉ. अलका कुमार ने किया। आभार डॉ. भावना यादव ने माना। संगोष्ठी में डॉ. सरोज गुप्ता, डॉ. प्रेमकुमार चतुर्वेदी, डॉ. शक्ति जैन, डॉ. सुनीता सिंह, डॉ. रजनी दुबे, डॉ. अनुभा शर्मा, डॉ. रश्मि मलैया, डॉ. अर्चना भार्गव, डॉ. बिंदु श्रीवास्तव आदि मौजूद थीं।
समापन कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सेंट्रल जेल की अधीक्षक श्रीमती अलका सोनकर थीं। उन्होंने कहा कि घर परिवार के लोगों का अटूट विश्वास ही महिला विकास में सहायक है।
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