पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • पहले ही दिन थैलीसिमिया पीडि़त 17 बच्चों को मिला इलाज

पहले ही दिन थैलीसिमिया पीडि़त 17 बच्चों को मिला इलाज

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पहला वार्ड स्थापित, जिले में 36 बच्चे हैं रजिस्टर्ड
सागर - बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार से थैलीसिमिया पीडि़तों के लिए इलाज शुरू कर दिया गया। पहले दिन 17 बच्चों को यहां भर्ती कर जांच एवं उपचार दिया गया। इनमें से तीन बच्चों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया गया। इसे संयोग ही माना जाएगा कि थैलीसिमिया पीडि़तों को ब्लड डोनेट करने के लिए भी 17 लोग आए। 14 बच्चों को प्राथमिक तौर पर दवाएं दी गई हैं व कुछ जांचों के सेंपल परीक्षण के लिए लैब भेजे गए।
थैलीसिमिया पीडि़तों के लिए नव निर्मित स्पेशल वार्ड का शुभारंभ करते हुए विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि जिन परिवारों में थैलीसिमिया से पीडि़त बच्चे हैं उनके लिए बीएमसी में इलाज की सुविधा सौगात से कम नहीं हैं। यहां पर सागर ही नहीं संभाग भर के पीडि़तों को नि:शुल्क उपचार मिल सकेगा। कमिश्नर श्री माथुर की स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति दृढ़ इच्छाशक्ति व पहल से यह वार्ड शुरू हो सका है। महापौर श्रीमती पुष्पा शिल्पी ने कहा कि थैलीसिमिया गंभीर बीमारी है। इनके लिए अधिक से अधिक लोग आगे आकर रक्तदान करें। कमिश्नर आरके माथुर ने कहा कि थैलीसिमिया वार्ड के बारे में अन्य जिलों के कलेक्टरों को भी बता दिया गया है। यदि उनके यहां कोई पीडि़त बच्चे हों तो उन्हें भी यहां इलाज दिलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो पीडि़तों की चिकित्सकीय जांचे प्रदेश, देश व विदेश भेजकर भी कराई जाएंगीं।आईजी पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि बीमार बच्चों के माता-पिता को कितनी पीड़ा होती है, इसका अंदाजा उन्हीं को होता है । इसलिए यह वार्ड ऐसे लोगों की पीड़ा को कम करने में सफल होगा तथा भविष्य में भी ऐसे कार्य होते रहेंगे । कलेक्टर योगेंद्र शर्मा ने कहा कि यह व्यवस्था संभाग के बच्चों के लिये अनूठी है । इसकी प्रतिपूर्ति सारे प्रदेश में होगी। डीन डॉ एलपी वर्मा ने बताया कि यहां व्यवस्थित उपचार होगा, आगे और भी सुविधाएं बढ़ेंगी। उन्होंने थैलीसिमिया को जड़ से मिटाने के लिए जेनेटिक काउंसिलिंग पर भी बल दिया। शिशु रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. एके रावत ने बताया कि यह रक्त की जेनेटिक बीमारी है। लाल रक्त कणिकाओं से संबंधित है । यदि शादी से पूर्व काउंसिलिंग हो जाए तो पता किया जा सकता है कि किस जोड़े की शादी होने वाली है, उनमें थैलीसिमिया के लक्षण है।
कार्यक्रम में संयुक्त संचालक स्वास्थ्य डॉ. केके ताम्रकार, बीएमसी अधीक्षक डॉ. आरएस वर्मा, सीएमएचओ डॉ. सीएल गोस्वामी, सिविल सर्जन डॉ. अजय बड़ोनिया, बीएमसी सहायक अधीक्षक डॉ. एसपी सिंह, उप अधीक्षक डॉ. राजेंद्र आर्या, डॉ. अरुण सराफ, रोटरी क्लब फीनिक्स के अध्यक्ष अभिषेक एवं असिस्टेंट गवर्नर मुकेश साहू सहित सहित थैलीसिमिया पीडि़त बच्चों के साथ परिजन, कॉलेज का स्टाफ और स्टूडेंट मौजूद थे।




पूछा-कब तक होगी

डायलसिस शुरू

कार्यक्रम के दौरान विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि मेडिकल कॉलेज शहरवासियों का सपना है। लेकिन कुछ कारणों से इसका पूरा लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा। उन्होंने मौजूद बीएमसी अधिकारियों से पूछा जब डायलसिस मशीनें हैं तो मरीजों का इसका लाभ क्यों नहीं मिल पा रहा। इसे जल्द शुरू कराएं। इस दौरान विधायक ने नर्सिंग स्टाफ की परिवीक्षा अवधि समाप्त करने व मेल नर्स स्टाफ को कॉलेज में आवास उपलब्ध कराने की बात भी कही। इसके पूर्व कॉलेज के नर्सिंग स्टाफ ने उन्हें समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा था।