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बीएमसी से निलंबित छात्र हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे
चैतन्य सोनी. सागर
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के निलंबित छात्रों ने शासन व कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अगले हफ्ते में इन्हें कोर्ट से राहत मिल सकती है। 2010 बैच के 23 छात्रों को पीएमटी फर्जीवाड़े की जांच में संदिग्ध माना जा रहा है। इनके खिलाफ फिलहाल जांच चल रही है। शासन स्तर से आदेश मिलने के बाद इन्हें कॉलेज प्रशासन ने निलंबित कर दिया था। बीएमसी में अध्ययनरत 2010 बैच के निलंबित छात्रों में से 18 ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए निलंबन की कार्यवाही के खिलाफ स्टे मांगा है। सूत्रों के अनुसार याचिका पर मंगलवार तक सुनवाई होगी। पीएमटी फर्जीवाड़े का मामला विधानसभा में उठने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग से आदेश आने के बाद 15 जनवरी को निलंबित कर दिया गया था। इनमें से 21 छात्रों को संदिग्ध मानते हुए इनके खिलाफ गोपालगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। इन सभी छात्रों के फोटो मिलान, थंब इंप्रेशन, हेड राइटिंग नमूने व हस्ताक्षर की जांच एफएसएल में पेंडिंग है।
फरवरी में प्री यूनिवर्सिटी एग्जाम : बीएमसी में 2010 बैच की मुख्य परीक्षाएं मार्च में आयोजित होंगी। इसके पूर्व मेडिकल कॉलेज स्तर पर इंटरनल असेसमेंट एग्जाम फरवरी माह में आयोजित होंगे। इंटरनल एग्जाम में पास होने के बाद ही मुख्य परीक्षाओं में बैठने की पात्रता मिलती है। अधिकारियों के मुताबिक पहले यह परीक्षाएं 3 फरवरी से होनी थी। कुछ कारणों से यह परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होंगी।
निलंबन हो सकता है रद्द : सूत्रों के मुताबिक आगामी दिनों में संदिग्ध छात्रों का निलंबन समाप्त हो सकता है। पूर्व में ग्वालियर व भोपाल मेडिकल कॉलेज में निलंबन के मामले में धरना-प्रदर्शन के बाद मंत्रालय स्तर से आए निर्देश के बाद संचालनालय स्तर से दोबारा छात्रों की जानकारी मांगी गई है। रिपोर्ट का दोबारा परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में दूसरे विकल्प पर भी विचार चल रहा है, जिसमें संदिग्ध छात्रों से अंडर टेकिंग लेकर उन्हें परीक्षा दिलाने के लिए कानूनी बिंदुओं पर जानकारी एकत्रित की जा रही है।