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लाइसेंस के विरोध में व्यापारियों की हड़ताल, बंद रहे बाजार
नगर संवाददाता - सागर
खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के विरोध में सोमवार को शहर के मुख्य बाजार आंशिक रूप से बंद रहे। खान-पान संबंधी वस्तुओं पर इसका असर ज्यादा रहा। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन पर यात्री चाय-नाश्ता और भोजन के लिए परेशान होते रहे, जबकि बाजार में लोग फल-सब्जी और किराना सामग्री के लिए एक बाजार से दूसरे बाजार भटकते रहे। करीब डेढ़ साल बाद शहर के व्यापारियों ने इस बंद का आह्वान किया था, लेकिन उस दौरान अनाज व्यापारी, पान-मसाला विक्रेता और सब्जी व्यापारी बंद में शामिल नहीं थे।
टोलियों में निकलकर कराया बंद
बंद को प्रभावी बनाने के लिए 5 से 10 व्यापारियों की टोलियां शहर के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय रहीं। उन्होंने उन व्यापारियों पर दबाव बनाया, जिन्होंने कारोबार खोले रखे थे। दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक बंद का असर ज्यादा रहा। इसके बार किराना, फल-सब्जी और चाय-नाश्ता की दुकानें व ठेले खुले देखे गए। हालांकि अनाज की इक्का-दुक्का दुकानें ही खुली थीं। बंद के बाद कुछ व्यापारी संगठन अलग-अलग समूहों में कलेक्टोरेट पहुंचे, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
....इसलिए कर रहे हैं लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन का विरोध
नमकीन, बिस्किट की एजेंसी चलाने वाले व्यापारी विनय सुहाने के अनुसार केंद्र सरकार का खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम का अधिकांश हिस्सा व्यापारियों के हित में नहीं है। उन्होंने बताया कि इस एक्ट में प्रावधान किया गया है कि अगर बाहर से पैक होकर आए माल पर पैकिंग या एक्सपायरी डेट, बैच नंबर, उसे तैयार करने में उपयोग की गई सामग्री, कीमत या वजन का उल्लेख नहीं है, तो उसे बेचने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होगी। दोष सिद्ध होने पर 3 लाख रुपए का जुर्माना का प्रावधान है। सुहाने का कहना है कि यह नियम मिलावटी सामग्री या नकली माल बेचने वाले के लिए ठीक है, लेकिन पैकिंग-एक्सपायरी डेट नहीं होने या वजन कम होने आदि के मामलों में यह उचित नहीं है। इससे व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। एक अन्य व्यापारी आशीष नायक का कहना है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की सैंपलिंग व्यवस्था भी दोषपूर्ण है। राज्य सरकार के पास फूड सैम्पल की जांच के लिए केवल एक लैब है, जहां पूरे प्रदेश से माल पहुंचता है। इस लैब की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का अभाव है। सैम्पल कब, लैब पहुंचा। उसकी सील की क्या स्थिति है, इससे व्यापारी हमेशा अनभिज्ञ रहते हैं। नतीजतन कई बार सही माल की रिपोर्ट गलत आ जाती है, जिसके खिलाफ अन्य उच्च लैब में अपील करने की सुविधा तक नहीं है। जब तक सरकार अपने कामकाज में पारदर्शिता नहीं लाएगी, हमारा इस अधिनियम के खिलाफ विरोध जारी रहेगा।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी नीलेश शर्मा के मुताबिक यह एक्ट व्यापारियों के खिलाफ में नहीं है। इसका अध्ययन करेंगे, तो उन्हें जानकारी मिलेगी कि यह केवल उन व्यापारियों के खिलाफ है, जो ग्राहक को गुमराह कर मिलावटी सामान बेचते हैं। यह एक्ट व्यवसायियों के हित में है क्योंकि सभी व्यवसायी किसी अन्य दुकानदार से स्वयं या अपने परिवार के लिए खान-पान की सामग्री खरीदते हैं। अगर उस दुकानदार ने उन्हें कोई अमानक या मिलावटी सामग्री थमा दी, तब क्या वह उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगे। जहां तक एक्ट में किए गए प्रावधानों की बात है, तो इसमें केवल मिलावटी या नकली सामग्री बेचने वालों के लिए कारावास की सजा का प्रावधान है। अमानक यानी जिसमें बताई गई सामग्री का उपयोग नहीं किया गया है और मिथ्या छाप यानी लेबल पर पूरी जानकारी नहीं देने वालों के लिए केवल जुर्माना भरना होगा। शर्मा के अनुसार जो व्यापारी 4 फरवरी 2014 तक पंजीयन नहीं कराते हैं या लाइसेंस नहीं लेते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
एक्ट वापस लेने तक जारी रहेगा बंद
व्यापारियों ने अपनी मांग के समर्थन में नमक मंडी में धरना दिया। जहां उन्होंने एक्ट के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान व्यापारियों ने कहा कि जब तक सरकार इस एक्ट को वापस नहीं लेगी, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। इस अवसर पर व्यापारी अमर जगाति ने कहा कि जब तक यह एक्ट वापस नहीं होता या देश के बाकी २९ राज्यों में लागू नहीं होता, हमारा बंद जारी रहेगा। कोई भी दुकान नहीं खुलेगी। सब्जियां-फल जैसे रोजमर्रा की जरूरत वाली सामग्री के कारोबार पर भी प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने कहा कि हमारे आंदोलन को शहर के अन्य व्यापारिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है।