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- विश्वविद्यालय ने मृत व्यक्ति को बना रखा है अपने केस का वकील
विश्वविद्यालय ने मृत व्यक्ति को बना रखा है अपने केस का वकील
नगर संवाददाता - सागर
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जानकारी मांगने पर डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय का लोक सूचना विभाग अब गलत जानकारी भी देने लगा है। विश्वविद्यालय ने हाल ही में एक आवेदक को चौंकाने वाली जानकारी दी है। विश्वविद्यालय ने करीब तीन साल पहले मृत हो चुके हाईकोर्ट के एक वरिष्ठ वकील को जीवित बताकर हाईकोर्ट में चल रहे अपने प्रकरण के बारे में जानकारी दी है। जानकारी के अनुसार आवेदक डॉ. अनिल किशोर पुरोहित ने 18 दिसंबर को सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन कर विश्वविद्यालय के लोक सूचना विभाग से विश्वविद्यालय के खिलाफ हाईकोर्ट में चल रहे केस नंबर डब्ल्यूपी-4975/2001 में पैरवी करने वाले वकील की जानकारी मांगी थी। करीब 21 दिन बीतने के बाद विश्वविद्यालय के लोक सूचना अधिकारी ने डॉ. पुरोहित को जानकारी दी कि संबंधित केस में हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता एनएस काले विश्वविद्यालय की ओर से पैरवी कर रहे हैं। जानकारों के अनुसार वरिष्ठ वकील श्री काले का करीब तीन साल पहले निधन हो चुका है। यदि हाईकोर्ट की वेबसाइट पर दर्ज जानकारी पर भरोसा किया जाए, तो केस नंबर डब्ल्यूपी-4975/2001 में विश्वविद्यालय की ओर से वकील एनएस काले नहीं बल्कि की उनकी फर्म काले एसोसिएट को पैरवी का जिम्मा सौंपा गया है।
काले साहब एक्सपायर हो गए हैं
॥हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता काफी समय पहले एक्सपायर हो गए हैं। कब एक्सपायर हुए यह एकदम तो नहीं बता सकता। आप मुझे कल ((मंगलवार को)) फोन लगा लीजिए, मैं आपको तारीख सहित बता दूंगा।
- बालकृष्ण उपाध्याय, वाइस चेयरमैन, स्टेट बार काउंसिल मध्यप्रदेश
काले साहब एक्सपायर हो गए हैं
॥हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता काफी समय पहले एक्सपायर हो गए हैं। कब एक्सपायर हुए यह एकदम तो नहीं बता सकता। आप मुझे कल ((मंगलवार को)) फोन लगा लीजिए, मैं आपको तारीख सहित बता दूंगा।
- बालकृष्ण उपाध्याय, वाइस चेयरमैन, स्टेट बार काउंसिल मध्यप्रदेश