पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • नोटिस मिला तो आनन फानन में जमा कराए 20 लाख रुपए

नोटिस मिला तो आनन-फानन में जमा कराए 20 लाख रुपए

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
चैतन्य सोनी - सागर
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में स्वशासी के तहत कार्यरत कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ की राशि तो हर माह काटी जा रही है, लेकिन ईपीएफ के खाते में जमा नहीं कराई। मामले को गंभीरता से लेते हुए जब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कार्यालय से नोटिस मिला, तो आनन-फानन में एक मुश्त 20 लाख रुपए से अधिक जमा करा दिए।
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में स्वशासी के अंतर्गत करीब 300 कर्मचारी पदस्थ हैं। इन कर्मचारियों के वेतन से हर माह औसतन साढ़े चार लाख से पांच लाख रुपए के आसपास कर्मचारी भविष्य निधि फंड की कटौती की जाती है। वेतन देते समय बीएमसी प्रबंधन ने कर्मचारियों के खाते से ईपीएफ की राशि तो काट ली, लेकिन भविष्य निधि खाते में जमा नहीं कराई। जानकारी के अनुसार जुलाई माह से ईपीएफ की राशि जमा नहीं कराई गई थी। इसको लेकर ईपीएफ कार्यालय से पूर्व में रिमाइंडर भी दिए गए। बावजूद इसके राशि जमा नहीं कराई गई। जनवरी माह की शुरुआत में क्षेत्रीय भविष्य निधि संगठन कार्यालय के आयुक्त की ओर से बीएमसी डीन को बकाया राशि जमा करने संबंधी नोटिस दिया गया था। नोटिस के अनुसार नियत तिथि तक कर्मचारियों के खाते की बकाया राशि जमा नहीं करने एफआईआर की कार्रवाई कराने की चेतावनी का उल्लेख था। नोटिस की गंभीरता को समझते हुए कॉलेज प्रबंधन ने 20 जनवरी को चार अलग-अलग किश्तों में करीब 20 लाख 35 हजार रुपए ईपीएफ खाते में जमा कराए हैं।



पैनल्टी लगाएंगे

बीएमसी ने जुलाई माह से ईपीएफ की राशि जमा नहीं कराई थी। बकाया वसूली के लिए शोकॉज नोटिस दिया गया था। बीएमसी द्वारा फिलहाल चार महीनों की राशि जमा की गई है। इस मामले में आगे पैनल्टी व इंटरेस्ट वसूलने की कार्यवाही के लिए नोटिस दिया जा रहा है। ईपीएफ के मामले में शासन के सख्त नियम है। इनका पालन करना जरूरी है।

- डीके मल्होत्रा, आयुक्त, क्षेत्रीय भविष्य निधि कार्यालय, सागर

ईपीएफ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार बीएमसी प्रबंधन ने पिछली जुलाई 2013 से दिसंबर 2013 तक की ईपीएफ की राशि जमा नहीं कराई थी। नोटिस के बाद 20 जनवरी को चार अलग-अलग किश्तों में जुलाई, अगस्त, सितंबर व अक्टूबर माह की राशि जमा कराई गई है। अभी भी नवंबर व दिसंबर माह की ईपीएफ की राशि बकाया है।

अधिकारियों ने दिया तर्क

बजट नहीं मिलने से वेतन अटका था

ईपीएफ जमा नहीं करने के मामले में कॉलेज प्रबंधन के संबंधित अधिकारियों का तर्क है कि कॉलेज में स्वशासी के तहत पदस्थ कर्मचारियों का ईपीएफ जमा किया जाता है। रेग्युलर कर्मचारियों का जीपीएफ कटता है। स्वशासी के तहत शासन स्तर से बजट नहीं मिलने के कारण वेतन अटक गया था। अभी भी कुछ कर्मचारियों का पिछले महीनों का वेतन बकाया बताया जा रहा है। बजट कम मिलने और वेतन देरी से बनने के कारण ईपीएफ की राशि जमा नहीं कराई जा

सकी थी।

दो माह का अभी भी बकाया