‘नेकी कर तय करो मोक्ष का रास्ता’
कार्यालय संवाददाता - बीना
धर्म का लाभ पाना है तो उसमें संलग्न होकर मन, कर्म और निष्ठा के साथ जुट जाओ। पल भर का समय देने से कुछ भी नहीं मिलेगा। यह बात बड़ी बजरिया स्थित दिगंबर जैन मंदिर में आदिनाथ भगवान के निर्वाणोत्सव पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रभासागर ने कही।
मुनिश्री ने कहा कि यदि मुनि नहीं बन सकते हो तो कम-से-कम इतना कर लो की श्रावक ही बन जाओ। बिना तप और कठिन परिश्रम के मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती है इसलिए मोक्ष का रास्ता अपनाना है तो अभी से नेकी और धर्म-कर्म का रास्ता पकड़ लो। मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य का जीवन-मरण सब ईश्वर के पास होता है। किसी की कम आयु होती है तो किसी की ज्यादा लेकिन इसका निर्णय भगवान ही करता है। उन्होंने कहा कि आदिनाथ भगवान के मरण दिन को निर्वाण का रूप दिया गया है। मुनिश्री अभयसागर ने कहा कि जो जन्मता है उसकी मृत्यु निश्चित है लेकिन आत्मा नहीं मरती इसलिए जितना हो सके जीवन को अच्छे कार्य में लगाना चाहिए ताकि जीवन रूपी नैया मंगलमय रूप में पार हो जाए और हम मोक्ष की प्राप्ति कर सके। उन्होने बताया कि आदिनाथ का दूसरा नाम त्रषभनाथ था। आधे तीर्थंकर के कारण उनका नाम आदिनाथ पड़ा।