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बंद के लिए डटे व्यापारी, शटरों पर जड़े रहे ताले
सागर - खान-पान की वस्तुओं के थोक-फुटकर व्यापारियों का कारोबारी बंद जारी है। तीसरे दिन कटरा, नमक मंडी, नया बाजार और सिविल लाइंस के अधिकांश प्रतिष्ठान बंद रहे। व्यापारियों का कहना है कि जब सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के बारे में ठोस निर्णय नहीं लेती है। हमारा आंदोलन जारी रहेगा। इधर धरना पर बैठे व्यापारियों से चर्चा करने के लिए बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट अर्चना सोलंकी नमक मंडी पहुंची। जहां व्यापारियों ने उन्हें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष लोकसभा, राज्यसभा, राज्य के मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष के नाम ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों ने कहा कि यह बंद गुरुवार को भी जारी रहेगा। सक्षम अधिकारी को न्यायालयीन शक्तियां देना स्वीकार नही :
व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष देवेंद्र केशरवानी ने कहा कि इस एक्ट में कई कानूनी खामियां हैं। जैसे कि इसमें सक्षम खाद्य अधिकारी को न्यायालय के समान शक्तियां दी गई हैं। जो व्यापारी के खिलाफ आरोप, सुनवाई के साथ जुर्माना या सजा सुना सकेगा। केशरवानी के मुताबिक यह शक्तियां वर्तमान की तरह न्यायालय के पास रहनी चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो व्यापार करना मुश्किल काम होकर रह जाएगा।
खाद्य पदार्थों के मानक तय किए जाएं : कारोबारी रमेश नायक का कहना है कि सरकार पहले हमें बताए कि हमें खाद्य तेल, नमकीन, चावल से लेकर फल-सब्जी किस स्टैंडर्ड या मानक की बेचनी है। लेकिन हकीकत यह है कि शासन ने ऐसे कोई मानक तय ही नहीं किए हैं। अगर यह कानून लागू हुआ तो खाद्य सुरक्षा से जुड़ा अमला छापामारी करेगा और सीधे कार्रवाई कर चलता बनेगा। नायक के मुताबिक खेतों में ज्यादा उपज के लिए तथा थोक मंडियों में फल- सब्जी को सुरक्षित रखने के लिए केमिकल्स व प्रिजर्वेटिव उपयोग किए जाते हैं। ऐसे में यह समझ से परे है कि उन्हें बेचने वाला व्यक्ति कैसे जिम्मेदार माना जाएगा।
पहले अपने विभागों पर कार्रवाई करनी चाहिए
संघ के उप कोषाध्यक्ष अमर जगाती का कहना है कि सरकारी उचित मूल्य की दुकानों पर एक रुपए किलोग्राम की दर पर नमक, गेंहू और चावल बेचा जा रहा है। लेकिन कभी भी खाद्य सुरक्षा अमला वहां बिकने वाले नमक, शकर और चावल की जांच नहीं करता। यही स्थिति स्कूल, आंगनवाड़ी की सप्लाई एवं दुग्ध संघ के प्रोडक्ट्स की है। अमला इनके निर्माण की प्रक्रिया और वितरण की भी कभी जांच नहीं करता है। इस स्थिति में हम कैसे मान लें कि सरकार का हमारे साथ पारदर्शितापूर्ण व्यवहार करेगी। सरकार की मंशा अगर सही है तो सबसे पहले अपने विभाग या उपक्रमों की जांच करे। इसके बाद व्यापारियों पर कार्रवाई करे।
औसतन ५ करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित
वर्णी कॉलोनी के थोक व्यापारी विनयकांत सुहाने के अनुसार बंद का असर धीरे-धीरे समझ आ रहा है। थोक मंडी बंद रहने से पोहा, नमकीन, मसाले, खाद्य तेल और गुड़-शकर की सप्लाई ठप पड़ी हुई है। भीतर बाजार, नया बाजार और वर्णी कॉलोनी में कुल जमा ५ करोड़ रुपए प्रति दिन का कारोबार प्रभावित हो रहा है। अगर बंद दो से तीन दिन और चलता है तो फिर इसका असर शहर के उन सभी फुटकर किराना दुकानों पर दिखने लगेगा। जो अभी खुल रही हैं। सुहाने के मुताबिक एक फुटकर एक किराना दुकान मेें औसतन ५ से ७ दिन तक का स्टॉक रहता है। बंद कायम रहने पर यह माल खत्म हो जाएगा।