जीवन में कभी छल, कपट मत करना : मुनिश्री
निज संवाददाता। ईशुरवारा
अतिशय क्षेत्र ईशुरवारा में ऐलक श्री विवेकानंदसागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि इंसान बाहर कुछ करता है और भीतर कुछ। ऊपर-ऊपर वह धर्म-ध्यान सब कुछ करता है परंतु फिर भी उसका कल्याण नहीं होता है। आशय यह है कि वह भीतर अपनी दृष्टि नहीं डाल पा रहा है। वह अपने आत्मत्व को नहीं पहचान पा रहा है इसलिए उसकी समस्त धार्मिक क्रियाओं का प्रतिफल उसे नहीं मिलता। इंसान यदि अपनी दृष्टि एक बार भी भीतर ले जाने में सफलता हासिल कर ले तो सृष्टि अपने आप ही बदल जाएगी। छल-कपट व्यक्ति को गर्त में ले जाती है।
ऐलकश्री ने कहा कि शरीर और आत्मा भिन्न है। शरीर तो मात्र साधन है आत्मतत्व को प्राप्त करने के लिए, भगवान बनने के लिए। बिना मनुष्य पर्याय के हम रत्नत्रय को धारण नहीं कर सकते। जिसके पास विवेक होता है वह ही राग-द्वेष से दूर हो जाता है। बिना विवेक के सब शून्य है। ऐलक श्री ने कहा मात्र वीतराग भगवान ही तुम्हारे हैं। न कोई कुछ साथ लाया था और न कोई कुछ साथ ले जाएगा। हम अकेले आए थे, अकेले ही जाना है। ऐलक श्री ने कहा जिसने अपने मन पर काबू पाना सीख लिया, भोग-विलास की वस्तुओं से परे हो गया, समझो वह जन्म-मरण से मुक्त हो गया।
ईशुरवारा में दो से अनुष्ठान शुरू : ईशुरवारा. दो फरवरी से वसंत पंचमी तक ईशुरवारा में शुरू हो रहे त्रिदिवसीय अनुष्ठान के बीच कई कार्यक्रम होंगे। ये अनुष्ठान मुनिश्री अजितसागर महाराज, ऐलक श्री विवेकानंद महाराज के सानिध्य में होंगे। चार फरवरी को राष्ट्रकवि चंद्रसेन ((भोपाल)) अपने साथियों सहित कविताओं का रसपान कराएंगे। अशोक जैन शाकाहार ने बताया कि मेला संस्थापक समाधिस्थ रूपचंद ईशुरवारा द्वारा शुरू किए गए इस अनुष्ठान में विनय कुमार डबडेरा वाले सागर, पदमचंद, शिखरचंद बेगमगंज, कमल जैन गैरतगंज, सुमत जैन सुनेटी, प्रमोद जैन राहतगढ़ वालों की ओर से नि:शुल्क भोजन एवं आवास की तैयारियां की गईं हैं।
मुनिश्री का ससंघ विहार
देवरीकलां - यहां विराजमान मुनिश्री विमलसागर, अनंतसागर, अचल सागरजी, धर्मसागर, भाव सागर महाराज का गुरुवार को सुबह सात बजे विहार हुआ। सैकड़ो भक्त उनके साथ सिंगपुर गंजन पहुंचे जहां पर मुनिश्री संघ आहार कर शाम पांच बजे तक कुदपुर गांव पहुंचे। शुक्रवार को झलोन में हो रहे पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव में होने वाले ध्वजारोहरण में वे शामिल होगें।
आज सुधार लो, कल खुद सुधर जाएगा
खुरई. मालथौन के बड़े जैन मंदिर में आर्यिका भावनामति माताजी ने कहा कि वर्तमान में हम जैसा कर रहे हैं वही भविष्य में हमको मिलने वाला है। आज सुधार लिया तो कल खुद सुधर जाएगा। उन्होंने कहा कि एक छोटा सा दीपक अंधकार को खत्म कर देता है उसी तरह धर्म की एक छोटी सी लौ भी भीतर के अंधकार को खत्म कर सकती है। आप एकांतवादी न बने। ईश्वर ने आपको दो आंखें, दो पैर दिए हैं फिर क्यों एक आंख या एक पैर लंगड़ाकर चलना चाहते हैं। व्यवहार और निश्चिय दो आंखों और दो पैर की ही तरह हैं, जो एक-दूसरे के पूरक भी हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर में मिले दान का उपयोग अपने निजी कार्यों में सर्वथा न करें। जहां तक बन सके तो दाता से पूछकर ही उसको व्यय करें। दान के पैसे का दुरुपयोग करने वालों को भव-भवांतरों तक भिक्षा-वृत्ति करनी पड़ती है, जो चक्रवर्ती एवं देवताओं के पास नहीं, वह उत्तम धर्म तुम्हें मिला है।
ईशुरवारा में प्रवचन देते विवेकानंद सागर महाराज
गढ़ाकोटा में चल रहे महामंडल विधान का समापन
गढ़ाकोटा - पथरिया रोड स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा भागचंद जैन ((हरदी वालों)) ने की। शांतिधारा का वाचन दमोह से आए पं. अभिषेक जैन एवं आशीष जैन ने किया। भरत बाहुबलि का चयन भरत चक्रवती दीपक चौका एवं बाहुबलि रतन जैन बने। रात में इंद्र दरबार लगा तथा भक्ति नृत्य अमित जैन एवं श्रीमति रीता जैन ने किया। शुक्रवार को भगवान आदिनाथ का जन्म महोत्सव एवं रात में बाल क्रीड़ा के बाद पालना झुलाया जाएगा ।