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रेत के समुद्र में बधाई नौरता नृत्य ने समा बांधा
नगर संवाददाता.सागर
भारत सरकार के सांस्कृतिक विभाग, उदयपुर पटियाला, इलाहाबाद एवं पर्यटन विभाग बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में हुए ‘ऊंट महोत्सव एवं धरती धोरां री’ में विभिन्न राज्यों के दलों ने अपने लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां दीं। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। देश के प्रसिद्ध कलाकारों ने उत्सव में भागीदारी की। कालबेलिया, घूमर, सिद्दी धमाल, भांगड़ा, गिद्दा, जिंदवा, फाग, हारौल, बधाई, नौरता, नितकर्मा आदि लोक कलाकारों ने अपने-अपने अंचलों की लोकनृत्य प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोहा। लाड़ेरा वसेरा में नृत्य दलों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं, तो बधाई नृत्य के साथ रेगिस्तान का जन सैलाब नृत्य करने लगा। नौबत यहां तक पहुंच गई कि स्थानीय पुलिस और दर्शकों के बीच बहस तक हो गई। दर्शक इस नृत्य में डूबे नजर आए। सोने के समान चमकती राजस्थान की धरा पर बुंदेली परिधान में सजे-धजे लोक नर्तक ऐसे लग रहे थे, मानो सारी इंद्रधनुषी छटा रेत के इस समुद्र में ही उतर आई हो। पर्यटन विभाग के डायरेक्टर ने बधाई को उस शाम की सबसे खूबसूरत प्रस्तुति से नवाजा। बधाई नृत्य को बधाई दी। गंगानगर, हनुमानगढ़, पीली गांव में जब बधाई नृत्य के लोक कलाकार, कला यात्रा में निकले, तो स्थानीय लोगों के साथ ही विदेशी सैलानी अपने कैमरों में बुंदेलखंड के इन कलाकारों और उनकी वेशभूषा को हमेशा के लिए कैद कर ले गए। फोटोग्राफर दल नायक अरविंद कुमार यादव, लोक दर्पण पारंपरिक एवं समकालीन फला रूपों की संस्था के संचालक निर्देशक के निर्देशन में 18 सदस्यीय दल ने मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। दल में नविता चौबे, अंकित, सुप्रिया जैन, मोनिका, मयूरी केशरवानी, पल्लवी, रिचा, वर्षा, पायल, वसीम खान, अतुल, नीरज सेन, संदीप, अजय, मास्टर महेश संदेला, बैजनाथ गौतम आदि शामिल थे।