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सिटी बस बोर्ड की बैठक चाय-नाश्ते के साथ पांच मिनट में खत्म

8 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता. उज्जैन
सिटी बस संचालित करने वाली नगर निगम की कंपनी के बोर्ड की पहली बैठक बुधवार को पांच मिनट में चाय-नाश्ते के साथ निपट गई। इसके एजेंडे पर अब अगली बैठक में चर्चा होगी। अगली बैठक की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
मक्सीरोड स्थित सिटी बस डिपो में दोपहर 3 बजे से आयोजित उज्जैन सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड कंपनी ((यूसीटीएसएल)) बोर्ड बैठक में चेयरमेन महापौर रामेश्वर अखंड, एमडी एनएस परमार व डायरेक्टर यूडीए के अधीक्षण यंत्री वीके तिवारी, आरटीओ एचआर रोहित, सीईओ एकता जायसवाल मौजूद थे। यूसीटीएसएल में डायरेक्टर के रूप में तत्कालीन एडीएम प्रकाश रैवाल, तत्कालीन एसडीएम आरएस मीना, तत्कालीन एएसपी महावीर मुजाल्दे भी हैं लेकिन इनका तबादला हो चुका है। ट्रैफिक डीएसपी विजय डेविड भी डायरेक्टर हैं लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। बस ऑपरेटर कंपनी की ओर से कुलदीप शाी मौजूद थे। बोर्ड के कुछ डायरेक्टर्स के तबादले हो जाने से बैठक में सिटी बस संचालन को लेकर चर्चा नहीं हो सकी। केवल कंपनी से संबंधित तकनीकी मामलों का निपटारा किया गया।




ये हुए फैसले

> निगम ने यूसीटीएसएल की जगह अब अवंतिका लोक परिवहन सेवा का गठन किया है। यूसीटीएसएल का अवंतिका लोक परिवहन सेवा में विलय किया गया।

> एमडी एनएस परमार का तबादला होने से उनकी जगह निगमायुक्त पद पर पदस्थ विवेक श्रोत्रिय कंपनी के नए एमडी बनाए गए। परमार ने श्रोत्रिय के नाम का प्रस्ताव रखा और उन्हें कार्यभार सौंप दिया।

> यह तय किया गया कि जिन डायरेक्टर्स के तबादले हो गए हैं, उनकी जगह नए डायरेक्टर्स को शामिल कर उनके डीन नंबर लिए जाएं।

> कंपनी के नए एमडी और डायरेक्टर्स के संबंध में कानूनी खानापूर्ति सीए द्वारा की जाएगी।

> कानूनी कार्रवाई पूर्ण हो जाने के बाद चेयरमेन दोबारा बैठक बुलाएंगे जिसमें तय एजेंडे पर चर्चा होगी।

ये नए डायरेक्टर होंगे

एडीएम अवधेश शर्मा, एसडीएम शैलेंद्रसिंह सोलंकी, एएसपी राजेश व्यास।

औपचारिक रह गई बैठक

कंपनी के एमडी और डायरेक्टर बदल जाने से बैठक औपचारिक रह गई। बैठक में कंपनी को लेकर कानूनी खानापूर्ति के निर्णय पांच मिनट में हो गए। चाय-नाश्ते के बाद बैठक का समापन हो गया लेकिन इसका एक बड़ा फायदा बोर्ड की बैठकों का सिलसिला शुरू हो जाना है। बोर्ड को ही सिटी बस के संबंध में निर्णय करने के अधिकार हैं। बोर्ड बन जाने से निर्णय लेने में देरी नहीं होगी। इससे बसों के संचालन में मदद मिलेगी।