कृषि मंडी की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी
व्यापार संवाददाता. उज्जैन
मंडी हड़ताल के तीसरे दिन भी कोई हल नहीं निकला। व्यापारी कामकाज पूरी तरह से जाम रहा। तीन दिन में उज्जैन मंडी में 3 करोड़ रुपए की किसानी कृषि उपज नहीं बिक पाई। व्यापारिक सौदे भी करोड़ों रुपए के जाम हो गए।
मंडी यार्ड इसे लागू न करें : अनाज तिलहन व्यवसायी संघ के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने बताया मंडी क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू नहीं होता इसे मामले में व्यापारी संघ दिल्ली के संपर्क में बना हुआ है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलामनबी आजाद से चर्चा चल रही है। इस कानून को मंडी यार्ड में लागू नहीं करें ऐसी मांग रखी है। महिदपुर के व्यापारी अजय चोपड़ा ने बताया मंडी व्यापार मेें खाद्य सुरक्षा अधिनियम बाधा है। मंडी में किसान खेत से कृषि उपज काटकर मंडी में नीलामी में बेचते हैं। इसमें अच्छा खराब सभी प्रकार का माल आता है। क्वालिटी अनुसार भाव मिलते हैं।
आलू-प्याज के भाव में गिरावट : मंडी में आलू, प्याज की आवक अच्छी होने के बाद भाव में लगतार गिरावट की स्थिति बन गई है। खरीदार कम और माल अधिक से भाव की स्थिति आगे भी कमजोर ही बताई जा रही है। नई लहसुन १००० से १२०० तक बिक रही है। पुरानी लहसुन ऊंचे में ३००० से ३५०० रुपए बिक रही है।
चिमनगंज में आलू, प्याज के थोक भाव इस प्रकार रहे : आलू १८० से २८० रुपए, प्याज २०० से ३२० रुपए प्रति ४० किलो। लहसुन १००० से ३१०० रुपए क्विंटल।
उज्जैन खली १००० से १०३० रुपए, कपास्या १८२५ से १९५०, खली खामगांव १७७० से १८७० रुपए के भाव रहे।
रुका सोयाबीन जल्दी बिकने लगेगा : मंडी खुलते ही सोयाबीन के स्टॉक वाले बेचने आने लगेंगे। बड़ी तेजी की आशा में ऊंचे भाव का सोयाबीन रखने वाले को ५०० से १००० रुपए के नुकसान की संभावना व्यापारिक क्षेत्र में व्यक्त की जा रही है। चने का अनुभव अच्छा नहीं रहने और इसमें ७०० से १००० रुपए प्रति बोरी का नुकसान उठाने वाले भी कम नहीं है। कच्चे स्टॉक वाले तो जल्दी ही इसे बेचकर गेहूं और नए चने के लिए कैश हाथ में रखेंगे।
बारिश से फसल प्रभावित : चने की उपज १० दिन लेट होने की संभावना है। गांव छीतरदेवी के किसान करणसिंह पटेल ने बताया मावठे की बारिश से जल्दी
पकने वाली उपज को नुकसान है। लेट आने वाली उपज को फायदा भी मिल रहा है। गांव सिकंदरी के किसान सोनू आंजना ने
वर्तमान के मौसम को कहीं धूप तो कहीं छांव वाला बताया है। इन्होंने कहा बढ़ती पैदावार पर मौसम का जाम लगने से किसान दुखी
होने लगे हैं।