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नई उपज लेट होने से गेहूं की टेंडर बिक्री में व्यापारी उत्सुक
व्यापार संवाददाता - उज्जैन
मौसम के पलटवार से गेहूं की उपज लेट होने से एक बार फिर एफसीआई के टेंडर की गेहूं खरीदी में व्यापारी उत्सुक दिख रहे हैं। इसके पूर्व के टेंडर में कोई खास उत्साह नहीं बना था। सूत्रों की माने तो एफसीआई स्माल ट्रेडर्स छोटे व्यापारियों के लिए भी गेहूं जारी कर सकती है। मिलर्स वाले एफसीआई का १६३७ रुपए क्विंटल वाला गेहूं खरीदने में लाभ ही मान रहे हैं। ग्रेडिंग वाले व्यापारी को २५-३० रुपए बोरी का लाभ मिल रहा है। आगामी शनिवार के टेंडर में उज्जैन से व्यापारी अधिक संख्या में जाने वाले हैं। पिछला गेहूं टेंडर १६३७ से १७४० तक भरे जाने की खबर है।
उज्जैन - मंडी में व्यापारी पुराने सौदों का माल लोड कर रहे हैं। वायदा सौदों में सोयाबीन प्लस आया। चने के भाव में तेजी बताई गई है। हड़ताल खुलते ही मंडियों में बंपर आवक की संभावना है। आलू २०० से ३२० रुपए, प्याज २०० से ३४० रुपए, लहसुन १००० से ४१०० रुपए क्विंटल। लोहा बाजार : टेस्टेड सरिया ४२५० रुपए क्विंटल। खली के भाव : उज्जैन खली १००० से १०३०, कपास्या १८२५ से १९५०, खली खामगांव १७७० से १८७० रुपए। उज्जैन मावा : मावा १४० से 1६४ रुपए प्रति किलो।
सीजन में खूब चलेगा डालर कारोबार: कृषि उपज मंडी में डालर चने का कारोबार सीजन में खूब चलेगा। मंडी सूत्रों के अनुसार डालर ग्रेडिंग के नए प्लांट भी लगने वाले हैं। करोड़ों रुपए लगाने वाले गोदाम तलाश कर व्यापार शुरू करेंगे। उज्जैन क्षेत्र में डालर का बड़ा कारोबार होने से बाहरी क्षेत्र के व्यापारी भी अब इसमें लाभ कमाएंगे। प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तो किसानों को भी दाम अच्छे मिलेेंगे। पिछले साल का डालर व्यापार नुकसान वाला भी रहा। इस वर्ष आगे के सौदे ५ हजार के पार होने से किसानों को नए डालर के महंगे भाव मिलने की अच्छी संभावना है। परंपरागत डालर के व्यापारी तो पहले से ही बड़ा व्यापार कर कंटेनर भर रहे हैं।
कामकाज ठप
संभाग की कृषि उपज मंडियों में कामकाज ठप चल रहा है। किसान की कृषि उपज नहीं बिकने से करोड़ों रुपए रोज का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम का विरोध मंडी व्यापारी कर मंडी नीलाम में अमानक उपज नहीं खरीद रहे। किसान भी इस मामले मेें व्यापारी का साथ दे रहे। मंडी में सभी प्रकार का अनाज बिकने आता है। इसमें अच्छा खराब भी भाव अनुसार बिकता है। अगर मंडियों की किसानी खरीदी पर यह अधिनियम लागू हुआ तो मंडियों में किसानों को उपज बेचना मुश्किल हो जाएगा। सरकार की ओर से कोई आश्वासन अभी तक नहीं मिल रहा।