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निगम 100 में से मात्र 34 खर्च करती है हम पर

7 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता. उज्जैन
नगर निगम को करों और वसूलियों से जितनी आय होती है, उसका मात्र 34 प्रतिशत हिस्सा ही निगम जनता से जुड़े कामों पर खर्च कर पाता है। निगम की वास्तविक वसूलियों और खर्च पर गौर करें तो यह हकीकत सामने आती है। निगम बजट प्रावधानों में कमाई के लिए जितना लक्ष्य तय करता है, वसूली उससे मुकाबले आधे से भी कम होती है। वसूली में सबसे खराब स्थिति संपत्तिकर विभाग की है।
नगर निगम को सबसे ज्यादा आय संपत्तिकर से होती है। इसके अलावा राजस्व अन्य कर, भंडार, नगर निवेश ((भवन अनुज्ञा आदि)), कॉलोनी सेल, स्वास्थ्य विभाग और पेयजल शुल्क वसूली से होती है। नगर निगम इस पैसे से नागरिकों की सुविधाओं के काम करता है। इसमें वार्डों के छोटे-बड़े निर्माण कार्य, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, पेयजल सप्लाई, सफाई व्यवस्था, उद्यानों का रख-रखाव व विकास आदि मुख्य है। हालांकि निगम को राज्य व केंद्र सरकार से अनुदान भी मिलते हैं। योजनाओं में भी पैसा आता है। अनुदान से वेतन-भत्ते और योजना राशि से संबंधित योजनाओं के काम कराए जाते हैं। नागरिकों के हिस्से में कर व शुल्कों से होने वाली आय ही आती है। हकीकत ये है कि इस राशि का भी बहुत कम हिस्सा सुविधाओं पर खर्च हो पाता है। वर्ष 2013-14 के खर्च और वसूली पर गौर करें तो पता चलेगा मात्र 34 प्रतिशत राशि ही जनता से जुड़े कामों पर खर्च की गई।
किस पर कितना खर्च
निर्माण कार्य ((54 वार्डों में सड़क, नाली, सामुदायिक भवन, फुटपाथ आदि))14.78
पेयजल प्रदाय 10.79
स्ट्रीट लाइट 5.70
उद्यान विकास 0.56
सफाई व्यवस्था 3.34
((राशि करोड़ रु. में))
-स्थापना यानी अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर 31.69 करोड़ रु. खर्च किए गए।
- जेएनएनयूआरएम योजनाओं में 10.60 करोड़ रु. तथा सिंहस्थ योजना में 15.04 करोड़ रु. खर्च किए।
और वसूली के ये हाल

कर लक्ष्य वास्तविक वसूली
संपत्तिकर 41.23 5.16
अन्य कर 2.73 1.29
भंडार 1.48 0.40
नगर निवेश 3.15 0.78
कॉलोनी सेल 5.37 1.37
स्वास्थ्य विभाग 1.28 0.16
पीएचई 17.41 4.32
((राशि करोड़ रु. में))
- निगम को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में 8.07 करोड़, राजीव आवास में 15.27 करोड़ तथा मुख्यमंत्री अधोसंरचना में 4 करोड़ रु. की राशि भी मिली।
एक्सपर्ट व्यू
डॉ. तपन चौरे, अर्थशाी, विक्रम विश्व विद्यालय, उज्जैन
नगर निगम और जनता के बीच 24 घंटे और जन्म से मृत्यु तक का नाता है। निगम का दायित्व भी है कि वह अधिकतम सुविधाएं नागरिकों को दें। आदर्श स्थिति तो यही है कि जनता अपने करों का भुगतान समय पर करे और निगम अपनी सेवाएं उपलब्ध कराएं। निगम के परिप्रेक्ष्य में दोनों की स्थिति ठीक नहीं है। निगम वसूली नहीं कर रहा। इस कारण जनता को सुविधाएं भी नहीं दे पा रहा। जरूरी यह है कि निगम परिषद वसूली बढ़ाने के लिए इच्छा शक्ति दिखाए। करों व शुल्कों से प्राप्त राशि जन सुविधाओं पर खर्च करे। राज्य व केंद्र से मिलने वाले अनुदानों का उचित उपयोग हो। बजट तैयार करते वक्त इन बातों पर विचार होना चाहिए।