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कहीं हाइड्रोलिक जेसीबी तो कहीं ग्लूकोज अलॉर्म बोतल

7 वर्ष पहले
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फोटो - अशोक मालवीय
भास्कर संवाददाता.उज्जैन
छोटी उम्र में बड़ी वैज्ञानिक सोच और बड़े कारनामे करने की ललक सोमवार को राज्यभर से आए विद्यार्थियों के मॉडलों में देखने को मिली। शासकीय शिक्षा महाविद्यालय में राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल एवं राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान जबलपुर की ओर से आयोजित तीन दिनी विज्ञान मेले की शुरूआत में सोमवार को कहीं हाइड्रोलिक जेसीबी तो कहीं ग्लूकोज अलॉर्म बोतल सहित मॉडलों को देखकर यह कहना मुश्किल था कि यह मिडिल से हायर सेकंडरी के विद्यार्थियों की ओर से इजाद किएगएहैं। ऊर्जा, कृषि , स्वास्थ, पर्यावरण और संसाधन विषय पर आधारित करीब 300 मॉडल विज्ञान मेले में प्रदर्शन के लिए रखे गए। मेले का शुभारंभ सुबह स्कूल शिक्षा मंत्री पारस जैन के मुख्य आतिथ्य में हुआ। विशेषअतिथिसिंहस्थ प्राधिकरण अध्यक्ष दिवाकर नातू थे। अध्यक्षता विधायक डॉ. मोहन यादव ने की। इस मौके पर मंत्री जैन ने कहाकि बच्चों की प्रतिभाओं को निखारने के लिए उन्हें हमेशा प्रोत्साहित कर आगे बढ़ाने का प्रयास शिक्षकों को करना चाहिए। शुभारंभ पर प्रतिभा कला संगीत संस्था की बालिकाओं ने सरस्वती वंदना के साथ नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में शाउमावि जीवाजीगंज की पत्रिका प्रतिभा का भी लोकार्पण हुआ। स्वागत भाषण राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल के संचालक दिनेश अवस्थी ने दिया। संचालन पद्मजा रघुवंशी ने किया। पहले दिन विद्यार्थियों व शिक्षकों की वैज्ञानिक संगोष्ठी, पर्यावरण एकल गीत, तत्कालीन भाषण और वैज्ञानिक भाषण के आयोजन हुए। मंगलवार को करीब 30 विषय विशेषज्ञ मॉडलों का मूल्यांकन करेंगे। विज्ञान मेले में चयनित होने वाले 5 मॉडल मुंबई में होने वाले राष्ट्रीय मेले का मप्र का प्रतिनिधित्व करेंगे। विज्ञान मेले में शासकीय उत्कृष्ट उमावि माधवनगर के इको क्लब की ओर से भी विज्ञान पर आधारित प्रदर्शनी लगाईगईहै।
बॉक्स
छोटे मॉडलों में दिखाई बड़ी सोच
फोटो - सिटी 9
- विद्यार्थी का नाम - आदर्श नामदेव
- गाइड का नाम - शिक्षिका मनीषा एस तोमर
- कक्षा व स्कूल - 9वीं, लोति स्कूल उज्जैन
- मॉडल का नाम - समुद्री लहरों से इलेक्ट्रिसिटी प्रोड्यूस
- खर्च व समय - 600 रुपए व 6 दिन
- खासियत - समुद्र से उठने वाली लहरों के असर से मॉडल में लगी टर्बाइन मशीन घूमती है। जिससे टर्बाइन और जनरेटर की मदद से बिजली उत्पादित की जा सकती है। पवन चक्की के मुकाबले यह तकनीक तीन गुना सस्ती है और प्रदूषण मुक्त है। इसे चट्टान पर भी लगाया जा सकता है।
फोटो - सिटी 10
- विद्यार्थी का नाम - आहन गुप्ता, शिवम तिवारी व साहिल खान
- गाइड का नाम - शिक्षक सुनील गुप्ता
- कक्षा व स्कूल - 12वीं, महर्षि विद्या मंदिर शहडोल
- मॉडल का नाम - हाइड्रोलिक जेसीबी
- खर्च व समय - 1500 रुपए, 3 दिन
- खासियत - जेसीबी को किसी भी लिक्विड से चलाया जा सकता है। लुब्रिकेंट मिलाने पर इसकी क्षमता बढ़ेगी और इसके चलाने से इलेक्ट्रिसिटी भी उत्पादित होगी।

फोटो - सिटी 11
- विद्यार्थी का नाम - लोकेश परमार
- गाइड का नाम - शिक्षक डॉ. योगेंद्र कुमार कोठारी
- कक्षा व स्कूल - 11वीं, शा.उत्कृष्ट उमावि माधवनगर उ&ह्नह्वशह्ल;ौन
- मॉडल का नाम - ग्लूकोज अलॉर्म बोतल
- खर्च व समय - 200 रुपए व 3 दिन
- खासियत - मरीज की ग्लूकोज की बोतल खत्म होने पर तुरंत एक अलॉर्म बजता है, जिससे तत्काल सही समय पर दूसरी बोतल लगाई जा सकती है। अस्पतालों के लिए बेहद उपयोगी।
फोटो - सिटी 12
- विद्यार्थी का नाम - अविनाश सेन
- गाइड का नाम - शिक्षक प्रवीण नायक
- कक्षा व स्कूल - 11वीं, जॉनसन इंग्लिश मीडियम स्कूल जबलपुर
- मॉडल का नाम - कम्युनिकेशन, हेल्थ एंड इनवायरमेंट मॉडल
- खर्च व समय - 500 रुपए व 2 दिन
- खासियत - फैक्ट्रियों, सोसायटियों व अन्य स्थानों से निकलने वाले गंदे पानी को री-साइकल कर पूर्णत: साफ किया जा सकता है। पानी को दोबारा सप्लाई करने के साथ गंदे पानी से निकलने वाले अनुपयोगी पदार्थों को री-साइकल कर खाद व बिजली बनाई जा सकती है।

फोटो - सिटी 13
- विद्यार्थी का नाम - संकेत कुमार जैन
- गाइड का नाम - शिक्षक शेख इजराइल
- कक्षा व स्कूल - 11वीं, न्यू आराधना कॉन्वेंट स्कूल परासिया छिंदवाड़ा
- मॉडल का नाम - सड़क दुर्घटना से बचाव व ऊर्जा संरक्षण
- खर्च व समय - 500 रुपए व 2 दिन
- खासियत - वाहन में लगे सेंसर से किसी अन्य वाहन के सामने आने पर अपर-डीपर लाइन आटोमैटिक चलेंगी। जिससे सड़क हादसों पर अंकुश लगेगा। इसके अलावा दिन और रात के हिसाब से भी आटोमैटिक वाहन की लाइट चालू-बंद हो सकेंगी।