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डाउनलोड करेंउज्जैन। वार्डों को हराभरा करने के लिए ट्री गार्ड लगाने के ठेके तो दिए गए लेकिन उनमें पौधे गायब हैं। ट्री गार्ड खड़े हैं और उनमें घास उग रही है। बुधवार को नगर निगम के वर्ष 2014-15 के बजट पर मंथन के दौरान ट्री गार्ड का मुद्दा उठने पर नगर निगम आयुक्त विवेक श्रोत्रिय ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने ठेकेदारों का भुगतान भी नहीं करने के लिए कहा है।
महापौर निवास पर बुधवार को सुबह 11 बजे से बजट पर मंथन को लेकर एमआईसी ((मेयर इन काउंसिल)) की बैठक हुई। नगर निगम के विभागवार प्रस्तावों व आय-व्यय पर चर्चा हुई। उद्यानिकी विभाग के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि शहर में 43 लाख के ट्री गार्ड लगे हैं लेकिन उनमें पौधे नहीं है।
पौधे की जगह उनमें घास उग रही है, जबकि ट्री गार्ड के ठेके में शर्त थी कि ठेकेदार को 5 फीट का पौधा लगाना है और तीन वर्ष तक पौधे की देखभाल करना है यानि उसे बड़ा करने की जिम्मेदारी भी ठेकेदार की ही थी। अधिकांश ट्री गार्ड में घास उग रही है और पौधे गायब हैं। बैठक में एमआईसी के एक सदस्य ने चुटकी ली कि मद खर्च नहीं हो रहा था तो ट्री गार्ड ही खरीद लिए। नगर निगम आयुक्त ने जांच के आदेश दिए हैं। ठेके की शर्तों का पालन नहीं होने पर कार्रवाई की जाएगी।
अतिक्रमण हम हटाएं, पीडब्ल्यूडी सड़क बनाए
नगरीय क्षेत्र की सड़कों का निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा किए जाने को लेकर भी एमआईसी सदस्यों ने आपत्ति जताई। महापौर रामेश्वर अखंड का तो यहां तक कहना था कि सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण नगर निगम हटाए और सड़क पीडब्ल्यूडी बनाए, ऐसा क्यों? महापौर ने निगम आयुक्त को कहा कि अब जब भी सिंहस्थ को लेकर बैठक लें तो इस मुद्दे को याद दिलाना। नगर निगम आयुक्त का भी कहना था कि नगर सीमा की सड़कें नगर निगम के पास ही होना चाहिए। क्योंकि निगम को पीएचई की पाइप लाइन, नाली आदि के बारे में पता होता है।
बैठक में ये थे मौजूद
महापौर रामेश्वर अखंड, एमआईसी सदस्य कलावती यादव, रजनी कोटवानी, गिरीश शास्त्री, संतोष यादव, सत्यनारायण गोयल, प्रकाश शर्मा, दुर्गाशक्ति सिंह चौधरी, संतोष निर्मल व निगम के अधिकारी मौजूद थे।
नगर निगम में एसई((अधीक्षण यंत्री)) स्तर के अधिकारी को लेकर चल रही चर्चा के बीच महापौर बोले हमारे पास एसई है कहां। निगम अधिकारी ने जब एसई का नाम बताया तो महापौर ने सवाल किया रामबाबू शर्मा को तुम एसई मानते हो क्या? असल में दो निर्माण कार्यों के टेंडर को लेकर महापौर का कहना था कि उसका मद नहीं आया और टेंडर हो गया।
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