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शिप्रा में मिलने वाले नाले नहीं रोके तो सिंहस्थ स्नान का बहिष्कार

7 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता - उज्जैन
यह बात शहर के अखाड़ों व आश्रमों के प्रमुख साधु-संतों ने बुधवार को शिप्रा में मिल रहे नदी-नालों के स्थलों का निरीक्षण कर मीडिया से चर्चा में कही। अंतरराष्ट्रीय मानव सेवाश्रम ट्रस्ट मक्सीरोड के अवधेश दास महाराज, रामघाट रामानुजकोट आश्रम के पीठाधीश्वर रंगनाथाचार्य महाराज, निर्वाणी अखाड़े के दिग्विजय दास महाराज ने कहा शिप्रा में मिल रहे खान व नालों के स्थलों का निरीक्षण कर संत समाज इससे संबंधित प्रस्ताव बना रहा है, जो जल्द मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री के नाम कलेक्टर बीएम शर्मा को सौंपा जाएगा। साधु-संत कार्रवाई के लिए 6 माह का समय देंगे, इसके बाद आंदोलन होगा। निरीक्षण में दिगंबर अखाड़े के पवनदास महाराज, ब्रज मोहनदास महाराज, स्वामी स्वयंप्रकाश, शिखरकर गुरु सहित करीब दो दर्जन साधु-संत शामिल थे।




जहरीला आचमन कर रहे

साधु-संतों ने निरीक्षण में यह बात बार-बार दोहराई कि आम श्रद्धालु रामघाट पर गंदे पानी में स्नान कर रहे हैं। यहां तक कि जहरीले पानी का आचमन कर रहे हैं, इसे रोकना होगा। यह लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है।

साधु-संतों के प्रस्ताव में ये सुझाव

> जगह-जगह स्टाप डेम बनाकर पानी रोकें, सीवरेज सिस्टम में सुधार।

> नदी किनारे अतिरिक्त नहर बनाकर पानी डायवर्शन करें।

> त्रिवेणी के पास फिल्टर प्लांट बनाकर पानी शिप्रा में मिलाएं, खेती के लिए उपलब्ध कराएं।

> जल विशेषज्ञों, इंजीनियरों के साथ साधु-संतों के सुझाव लें।

सांवेर के पास शिप्रा में मिल रहा केमिकल युक्त पानी

साधु-संतों का प्रतिनिधि मंडल निजी वाहनों से मीडियाकर्मियों के साथ 25 किमी. दूर सांवेर के पास पहुंचा, जहां शिप्रा में खान नदी का केमिकल युक्त झागदार पानी मिल रहा था। इसी के आसपास से कुछ नाले भी नदी में मिलते दिखे। इंदौररोड पर त्रिवेणी संगम से पहले भी यही स्थिति थी। यहां भी खान नदी का काला पानी सीधे शिप्रा में प्रवाहमान होते दिख रहा है। यह देख संतों ने नाराजगी व्यक्तकी लेकिन उनकी पीड़ा सुनने न प्रशासन का अधिकारी और न ही कोई जनप्रतिनिधि मौजूद था।

शिप्रा में मिल रहे नदी-नालों के स्थलों का निरीक्षण करते साधु-संत।

शिप्रा में नालों का पानी नहीं रोका तो हजारों साधु-संत सिंहस्थ 2016 में स्नान नहीं करेंगे। शासन-प्रशासन शिप्रा में नर्मदा का जल मिला रहा है, इसका स्वागत है लेकिन इससे शिप्रा शुद्ध नहीं होगी। संतों ने कहा शिप्रा शुद्धिकरण के लिए इंदौर की खान नदी का केमिकल युक्तऔर नालों का पानी डायवर्शन कर रोकें नहीं तो आंदोलन करेंगे।