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जनआंदोलनों से हुई वैश्विक बदलाव की शुरुआत

7 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता.उज्जैन। पिछले एक दशक में जनआंदोलनों के जरिए विरोध का स्वर भी विश्वव्यापी हुआ है और अब जन आंदोलनों से बदलाव की शुरूआत हो चुकी है। यह बात भारत सरकार के विधि आयोग के सदस्य प्रोफेसर मूलचंद्र शर्मा ((नईदिल्ली)) ने बुधवार शाम तृतीय प्रोफेसर रामसखा गौतम स्मृति व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए कही। भरतपुरी स्थित मप्र सामाजिक विज्ञान शोध संस्थान के सभागृह में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता विक्रम विवि के कुलपति प्रो. जवाहरलाल कौल ने की। स्वागत भाषण संस्थान की अध्यक्ष डॉ. नलिनी रेवड़ीकर ने दिया। संचालन तापस दलपति ने किया एवं आभार निदेशक प्रो. यतींद्र सिंह सिसौदिया ने माना।
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षक करें पहल
संस्थान में बुधवार से विद्यालयीन शिक्षा का स्वरूप एवं समाज के कमजोर वर्ग चुनौतियां एवं संभावनाएं ((अनुसूचित जातियों के विशेष संदर्भ में)) विषय पर दो दिनी सेमिनार की भी शुरुआत हुई। मुख्य अतिथि मप्र अजा आयोग के सदस्य जगदीश रोकड़े थे। अध्यक्षता प्रो. नलिनी रेवड़ीकर ने की। मुख्य वक्ता शिक्षाविद् रमेश दवे ((भोपाल)) थे। स्वागत भाषण प्रो. यतींद्र सिंह सिसौदिया ने दिया। संचालन डॉ. मनु गौतम ने किया एवं आभार डॉ. जीआर गांगले ने माना। गुरुवार दोपहर 1 बजे सेमिनार का समापन होगा।