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छह डॉक्टर 6 साल से नदारद

8 वर्ष पहले
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कार्यालय संवाददाता - विदिशा
जिले भर में स्वास्थ्य केंद्रों के बुरे हाल हैं। पूरे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की नब्ज ढीली है। जिले के 3 स्वास्थ्य केंद्रों में एक भी डाक्टर पदस्थ नहीं हैं। वहीं पीपलखेड़ा जैसे कई स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं जो पिछले 5 सालों में भी बनकर तैयार नहीं हुए हैं। जिन स्वास्थ्य केंद्रों में निर्माण कार्य पूरा हो गया है और वे पूरी तरह से तैयार हैं तो भी उनका शुभारंभ नहीं किया जा रहा है। इसमें गंजबासौदा का नवनिर्मित नेत्र चिकित्सालय और प्राइवेट वार्ड का भवन शामिल है।
जिला अस्पताल विदिशा के और बुरे हाल हैं। यह एक रेफरल हास्पिटल है और यहां विशेषज्ञ डाक्टरों की भारी कमी चल रही है। पूरे जिले के हेल्थ सेंटरों में गौर किया जाए तो आधे से ज्यादा पद रिक्त पड़े हैं। जिला अस्पताल में ही आधा दर्जन से ज्यादा ऐसे डाक्टर हैं जो 6 साल से भी ज्यादा समय से ड्यूटी पर नहीं पहुंचे हैं। इनमें कई तो ज्वाइन करने के बाद ही दोबारा नहीं लौटे हैं।
पीपलखेड़ा में 5 साल में भी पूरा नहीं अस्पताल
विदिशा। नटेरन ब्लाक के ग्राम पीपलखेड़ा में वर्ष 2009 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मंजूर हुआ था। इसके बाद वर्ष 2010 में इसे अपग्रेड कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया और 1 करोड़ 97 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई। पिछले 5 सालों में यहां केवल अधूरा स्ट्रक्चर ही खड़ा है।
यहां स्वास्थ्य केंद्र खुलने का लोगों का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। इलाज के लिए आसपास क्षेत्रों में जाना पड़ता है।

नटेरन, त्योंदा, लटेरी में एक भी डाक्टर नहीं

जिले में नटेरन, त्योंदा और लटेरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक भी डाक्टर पदस्थ नहीं है। नटेरन में ग्राम बरखेड़ा जागीर से, त्योंदा में ग्राम कुल्हार से और लटेरी में ग्राम रुसल्लीदामा से डाक्टर भेजकर कामचलाऊ व्यवस्था की गई है। आसपास के सैकड़ों गांवों के लोग परेशान हो रहे हैं।



ये डाक्टर ज्वाइन करने के बाद अब तक नहीं लौटे

> लटेरी अस्पताल में डा. अभिषेक जैन ने विगत 22 अगस्त 2013 को ज्वाइन तो कर लिया लेकिन उसके बाद अब तक नहीं लौटे।

> शमशाबाद अस्पताल में डा. निशांत दोहरे 12 अगस्त 2013 को ज्वाइन करने के बाद से अब तक गायब।

> डा. आसनअली राजदीप ने 31 अगस्त 2013 को जिला अस्पताल विदिशा में ज्वाइन करने का आर्डर प्राप्त कर लिया लेकिन अभी तक ज्वाइन ही नहीं किया और ना ही कोई जवाब दिया।

> डा. वरुण राय 10 सितंबर 2013 को जिला चिकित्सालय विदिशा में केवल अपनी ज्वाइनिंग भर दी थी। इसके बाद जब से वे गए तो अभी तक लौटे ही नहीं।

> डा. नेहा श्रीवास्तव ने 13 सितंबर 2013 को गंजबासौदा अस्पताल में ज्वाइन किया था लेकिन वे भी दोबारा नहीं लौटीं।

> डा. मधु खरे अग्निहोत्री ने 17 सितंबर 2013 को जिला अस्पताल विदिशा में अपनी ज्वाइनिंग दी थी लेकिन उस दिन के बाद अब तक नहीं आई हैं।

कमी से अवगत कराया

॥जिले में डाक्टरों की कमी पूरे करने के लिए शासन को बार-बार पत्र लिखकर समस्या को ध्यान में ला रहे हैं लेकिन आवश्यकता के अनुरूप डाक्टरों की भर्ती नहीं हो पा रही है। डाक्टरविहीन स्वास्थ्य केंद्रों में आसपास के गांवों में डाक्टरों को अटैच कर इमरजेंसी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

डा. सुधीर जेसानी, सीएमएचओ विदिशा



डाक्टरों की कमी पड़ रही मरीजों पर भारी

1. जिले में डाक्टरों के स्वीकृत पद संख्या- क्लास वन- 72 पद और क्लास टू के 86 पद

2. नर्सेज के स्वीकृत पद संख्या- 159

3.अन्य एमपीडब्ल्यू यानी पुरुष हेल्थ वर्कर पद संख्या- 147

4. जिले में तैनात डाक्टरों की संख्या- क्लास वन के 27 और क्लास टू के 64

5. जिले में तैनात नर्सों की संख्या- 92

6. अन्य स्टाफ एमपीडब्ल्यू कार्यरत- 94



ञ्चकई स्वास्थ्य केंद्रों के भवन सालों से पड़े हैं अधूरे

ञ्चस्वीकृति के हिसाब से आधे भी नहीं हैं जिले में डाक्टर

जिले के तीन स्वास्थ्य केंद्रों में एक भी नहीं डॉक्टर

डाक्टरों के आधे से ज्यादा पद खाली

1. जिला अस्पताल में प्रथम श्रेणी के 33 में से केवल 15 डाक्टर कार्यरत

२. जिला अस्पताल में द्वितीय श्रेणी के 25 डाक्टरों में 6 डाक्टर 5 साल से अनधिकृत तरीके से अनुपस्थित हैं।

३. ब्लाकों में सामुदायिक केंद्रों की संख्या- 7

४. ग्रामीण इलाकों में प्राइमरी हेल्थ सेंटरों की संख्या 21

५. 21 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में से केवल 19 के पास भवन हैं। पीपलखेड़ा और त्योंदा में निर्माण कार्य चल रहा है।

६. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र त्योंदा का भवन 2 करोड़ 20 लाख की लागत से 2 साल में बनकर तैयार हो गया है लेकिन फिनिशिंग का काम पूरा नहीं होने से यह शुरू नहीं हो पा रहा है।

७.ग्राम उदयपुर और वर्धा में 1-1 करोड़ रुपए की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण कार्य फिनिशिंग लेवल तक पहुंच गया है लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग को इन भवनों का पजेशन नहीं मिला है।

८.गंजबासौदा के शासकीय जन चिकित्सालय में 10 करोड़ की लागत से 10 कमरों का प्राइवेट वार्ड 2 साल से बनकर तैयार है लेकिन उद्घाटन का इंतजार है। इसी तरह यहां पर नेत्र वार्ड भी 1 करोड़ की लागत से बनकर तैयार है लेकिन 2 साल से उद्घाटन का इंतजार किया जा रहा है।

९.गंजबासौदा तहसील के ग्राम गमाखर में 1 करोड़ की लागत से उप स्वास्थ्य केंद्र बनकर तैयार है लेकिन 2 साल से इसके शुभारंभ का इंतजार किया जा रहा है।



विदिशा। जिला अस्पताल भवन।