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एक दर्जन से ज्यादा सेक्टरों में विभाजित है मेला
कार्यालय संवाददाता - विदिशा
श्रीरामलीला मेला समिति ने व्यवस्था की दृष्टि से संपूर्ण रामलीला मेला परिसर को 12 से 15 तक अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया है, ताकि लोगों को खरीदारी में सुविधा हो।
मेला समिति के सचिव सुरेशबाबू शर्मा ने बताया कि मेले में न केवल जिले से बल्कि देश भर के व्यवसायी आते हैं। पूरे मेला परिसर में 300 से ज्यादा छोटी-बड़ी दुकानें आवंटित की गई हैं। सुविधा की दृष्टि से अयोध्या भवन के पीछे चाट-मिठाई, हैंडलूम, प्लास्टिक आयटम, जूता-चप्पल, क्राकरी बाजार को स्थापित किया गया है। इसी तरह मेले के पूर्वी प्रवेश द्वार से लगकर साफ्टी, आइसक्रीम, भेल-पूरी, फोटो स्टूडियो तथा कपड़ा बाजार को जगह दी गई है। अयोध्या के पीछे चूड़ी बाजार, बैग-पर्स, मनिहारी, फर्नीचर, गृह सज्जा वाले आयटम, आयुर्वेदिक दवाएं, चकला-बेलन-कड़ाही बाजार, की रिंग्स, पूजा सामग्री, प्रसाधन सामग्री, खेल-खिलौने तथा बर्तन बाजार लगाया गया है। एक स्थान पर एक ही तरह की दुकानें होने से खरीददारी करने वाले आसानी से मनपसंद चीजे खरीद सकेंगे।
फुटपाथ पर भी सजी हंै
अनगिनत दुकानें
रामलीला परिसर में ऐसे भी सैकड़ों छोटे व्यवसायी हैं जो दोपहर को किसी भी खाली पड़े स्थान पर दरी बिछाकर छोटे-छोटे आयटम बिक्री के लिए लेकर बैठ जाते हैं। इनमें खेल खिलौने, फुग्गे, वेट मशीन, मेहंदी, गोदने वाले, प्लास्टिक आयटम, आर्टिफिशियल फूल, फोटो फ्रेम, फैंसी आइटम जैसी कई वस्तुएं शामिल है।
एक्टिंग छोड़कर आए
दिल्ली से आए सनम बाबला अंगार, अब तक 36 जैसी कई फिल्मों में एक्टिंग करते-करते अपने ससुर के कारोबार को संभालने अब मेलों में आने लगे हैं। वे इस बार मेले में ब्रेक डांस, ज्वांइट व्हील 20 पालकी, बड़ी नाव था चांद-तारे लाए हैं। पूछा जाने पर फिल्में छोड़कर यहां क्यो? तो उनका जवाब था इसमें ज्यादा कमाई है। इसी प्रकार उज्जैन के छोटे अफजल का परिवार पिछले 30 सालों से यहां आ रहा है। 24 और 20 पालकी वाले सबसे बड़े झूलों के साथ बड़ी नाव, ड्रेगन, ब्रेकडांस मेले में सभी को आकर्षित कर रहे हैं।
इस बार रिकार्ड 50 से ज्यादा झूले आए हैं मेले में
विदिशा मेले का झूला सेक्टर पूरी तरह भरा नजर आता है। यहां छोटे तथा बड़े मिलाकर 50 से ज्यादा झूले आ रहे हैं। इनमें हाथ से चलने वाले झूलों की संख्या भी काफी है। दोपहर के बाद तथा छुट्टी के दिन इस सेक्टर में अत्यधिक भीड़ भाड़ रहती है।
झूले वालों का पुश्तैनी रिश्ता है विदिशा मेले से
विदिशा। पहले उनके दादा आते थे, बाद में पिताजी आने लगे और अब तीसरी पीढ़ी के लोग विदिशा के प्राचीन मेले में झूले, सरकस, डांस पार्टी सहित मनोरंजन के अन्य साधन लेकर आ रहे हैं। जिस तरह रामलीला का मंचन पीढिय़ों से कुछ परिवारों द्वारा किया जा रहा है ठीक उसी तरह मेले में मनोरंजन करने का जिम्मा भी कुछ परिवारों ने संभाल रखा है। स्थानीय मेले के बारे में सभी की एक राय थी कि हम सारे देश के मेले करते हैं लेकिन एसा साफ- सुथरा, शांतिपूर्ण तथा बेहतरीन व्यवस्थाओं वाला मेला कोई और नहीं है। यहां खर्च कम और आय के अवसर ज्यादा रहते हैं। कभी कोई विवाद या गुंडागर्दी यहां देखने नहीं मिली है। सभी आयटम वालों के मेले में स्थान निर्धारित रहते हैं। उन्हें जगह के लिए परेशान नहीं होना पड़ता।
42 सालों से आ रहे हैं
65 वर्षीय ग्वालियर निवासी अब्बूभाई बताते हैं कि वे पिछले 42 सालों से लगातार यहांं आ रहे हैं। इस बार वे मेले में आक्टोपस झूला, चांद-तारा, बच्चों की ट्रेन तथा ड्रेगन ट्रेन लेकर आए हैं। 70 वर्षीय हीराभाई वैसे है तो पड़ोसी जिले रायसेन के लेकिन उनके झूले देश भर के मेले की शान बनते हैं। वे विदिशा मेले में 19 सालों से लगातार आ रहे हैं। इस बार मेले में वे जाइंट व्हील, ड्रेगन ट्रेन तथा नाव लेकर आए हैं।
यहां जैसी सुविधा कहीं नहीं
ग्वालियर निवासी कल्लूभाई उर्फ डीके अग्रवाल भी पिछले 30 सालों से लगातार मेले में आ रहे हैं। हालांकि उनकी डांस पार्टी को कई बार अनुमति नहीं मिल पाई थी लेकिन वे साथ में अन्य मनोरंजक आयटम भी लाते हैं। इस बार भी उनके द्वारा लाई जुगनू डांस पार्टी लोगों को आकर्षित कर रही।
रामलीला - 113 वर्षों से संचालित रामलीला मेले में 300 से ज्यादा दुकानें लगीं, दूर दराज से आते हैं लोग
ञ्चपरिसर में बनी हैं 300 से ज्यादा कांक्रीट की पक्की दुकानें
ञ्चप्रांगण के चारों ओर बने स्टेडियम में बैठ सकते हैं 50 हजार दर्शक
विदिशा। रामलीला में ५० से भी ज्यादा छोटे-बड़े झूले आए हैं। रात के समय झूले रोशनी से जगमगाते दिखाई देते हैं।
पं. चंद्रकिशेर शास्त्री
विदिशा। फुटपाथ पर लगी कई दुकानें।