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चित्रकूट में राम से मिले भरत

7 वर्ष पहले
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कार्यालय संवाददाता - विदिशा
मंगलवार को रामलीला के पंद्रहवें दिन भगवान राम का चित्रकूट पर भरत मिलाप हुआ। लीलाक्रम में भगवान राम, लक्ष्मण एवं जानकीजी चित्रकूट मुनि आश्रम पहुंचे। चारों ओर खुशियां छाई थी।
इधर अयोध्या में महाराज दशरथ श्रीराम के वियोग में प्राण त्याग देते हैं। पूरी नगरी में शोक छा जाता है। मुनिगण आकर धैर्य बंधाते हैं। भरत और शत्रुघ्न को माता के यहां से बुलावा आता है। दोनों भाई माता कौशल्या के यहां जाते हैं। फिर माता कैकयी के यहां जाकर पिताश्री के बारे में पूछते हैं। मां द्वारा यह कहने पर कि बेटा मैंने तुझे राजपाट दिला दिया है को सुनकर माता कैकयी एवं भरत में तीखा संवाद होता है। दोनों भाई मंथरा की पिटाई कर देते हैं। दोनों भाई, गुरुजन, प्रजाजन राजकीय सम्मान के साथ महाराज दशरथ का अंतिम संस्कार करते हैं।
भरत-शत्रुघ्न श्रीराम को अयोध्या वापस बुलाने के लिए चित्रकूट पहुंचते हैं। पिताश्री के देहावसान का समाचार सुनकर राम-लक्ष्मण तथा जानकीजी विलाप करते हैं। भरतजी श्रीरामजी से वापस अयोध्या चलकर राजगद्दी संभालने का आग्रह करते हैं। श्रीराम भरतजी का आग्रह नहीं मानते हैं। तब भरतजी रामजी की चरण
पादुकाएं लेकर वापस लौट जाते हैं।




रामलीला में आज होगा खरदूषण वध

विदिशा। रामलीला में बुधवार 29 जनवरी को खरदूषण वध व शूर्पणखां की नाक काटने की लीला प्रदर्शित होगी। लीला क्रम में भगवान चित्रकूट से पंचवटी में आएंगे। वहां पर शूर्पणखां आकाश मार्ग से विचरण करेंगी। वहां से गुजरते समय दोनों भाईयों एवं जानकीजी का रूप देखकर उन पर मोहित होगी। वह सुंदरी का रूप धारण कर रामजी के पास आकर विवाह का प्रस्ताव रखेगी।श्रीराम कहेंगे कि मैं विवाहित हूं। वे सुंदरी को श्री लक्ष्मणजी के पास पहुंचाएंगे। लक्ष्मणजी भी उसके विवाह प्रस्ताव को ठुकरा देंगे। वह बारी-बारी से श्रीराम एवं लक्ष्मणजी के पास जाएगी। अंत में क्रोधित होकर लक्ष्मणजी उसकी नाक काट देंगे। वह रोती हुई अपने भाई खर दूषण के पास जाएगी। खरदूषण क्रोध में आकर विशाल सेना लेकर मैदान में आएगा। दोनों ओर से युद्ध होने के बाद भगवान राम खर-दूषण का वध कर देंगे

रामलीला - धूप निकलने के साथ ही मेले में फिर से उमडऩे लगे दर्शक, नटेरन में रामबारात का हुआ घर-घर भव्य स्वागत

रामलीला में रावण वध अब सात को

कार्यालय संवाददाता - विदिशा

श्रीरामलीला की सबसे प्रमुख लीला रावण वध का मंचन अब चार फरवरी के स्थान पर सात फरवरी को होगा। तीन दिन लगातार हुई बारिश के बाद रामलीला को स्थगित करना पड़ा था। श्रीरामलीला दर्शन समिति की बैठक के बाद सोमवार को यह निर्णय लिया गया।

उल्लेखनीय है कि रावण वध की लीला देखने देश-प्रदेश भर से 50 हजार से ज्यादा लोग आते हैं। राम-रावण की सेना में भीषण युद्ध के साथ ही आतिशबाजी का होने वाला जंगी मुकाबला दर्शनीय होता है। यह लीला अब सात फरवरी शुक्रवार को देखी जा सकेगी। लीला क्रम बढऩे के कारण अब भगवान की रामलीला प्रांगण से नगर में वापसी 10 फरवरी को होगी। इस निर्णय से मेले के व्यवसायियों को राहत मिलेगी जिनके कारोबार बारिश से प्रभावित हुए थे। यह जानकारी रजिस्टर्ड सभा के मंत्री सुरेश शर्मा शास्त्री ने दी।

विदिशा। चित्रकूट पर भरत मिलाप की लीला हुई।

नटेरन। राम बारात के बाद राजकुमारों के पैर पखारे गए।