गोष्ठी में महंगाई और दहेज पर कटाक्ष
विदिशा। कुछ दीप शान से जले, कुछ टिमटिमाए और कुछ अंतिम बूंद तक रोशन रहे। ये पक्तियां हिंदी सेवा समिति द्वारा गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित काव्य गोष्ठी में डॉ. नवीन शर्मा ने सुनाई।
आयोजन कायस्थ धर्मशाला शेरपुरा में हुआ। अध्यक्षता डॉ. नवीन शर्मा ने की। संचालन विपुल शर्मा ने किया। सर्वप्रथम राम आर्य व्यथित ने विवेकानंद जन्म सार्ध शती के उपलक्ष्य में अपना आलेख पढ़ा। सोबरनसिंह ने कहा माता-पिता की जो करें नित सेवा सम्मान, सदा रहें आनंद मय खुश होवे भगवान। औसाफ अहमद की गजल,आपने जो जुल्म ढाए रात भर, जख्म दिल के मुस्कुराए रात भर, मजहबों के नाम पर औसाफ फिर जालिमों ने घर जलाए रात भर। शिव डोयले ने अपने लघु मुक्तक में कहा दहेज, महंगाई की समस्या तगड़ी है, गरीब को पेट पालने की पड़ी है। हल करते-करते बूढ़ा हो गया बाप, बिटिया की उमर सवाल बनकर खड़ी है। राम आर्य व्यथित ने सुनाया बलिदानों की गाथा गाती आई। अंत में हिंदी सेवा समिति अध्यक्ष राम आर्य व्यथित ने सभी का आभार माना।