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गोष्ठी में महंगाई और दहेज पर किए कटाक्ष

7 वर्ष पहले
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कार्यालय संवाददाता - विदिशा
कुछ दीप शान से जले, कुछ टिमटिमाएं और कुछ अंतिम बूंद तक रोशन रहे। यह पक्तियां हिंदी सेवा समिति द्वारा गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित काव्य गोष्ठी में डा. नवीन शर्मा ने सुनाई।
काव्य गोष्ठी का आयोजन कायस्थ धर्मशाला शेरपुरा में किया गया। अध्यक्षता डा. नवीन शर्मा ने की तथा संचालन विपुल शर्मा ने किया। सर्वप्रथम राम आर्य व्यथित ने विवेकानंद जन्म सार्ध शती के उपलक्ष्य में अपना आलेख पढ़ा। सोबरनसिंह ने माता-पिता का महत्व बताते हुए कहा माता-पिता की जो करें नित सेवा सम्मान, सदा रहे आनंद मय खुश होवे भगवान। औसाफ अहमद की गजल थी आपने जो जुल्म ढाए रात भर, जख्म दिल के मुस्कुराए रात भर, मजहबों के नाम पर औसाफ फिर जालिमों ने घर जलाए रात भर।
दहेज और महंगाई पर चोट करते हुए शिव डोयले ने अपने लघु मुक्तक में कहा दहेज, महंगाई की समस्या तगड़ी है, गरीब को पेट पालने की पड़ी है। हल करते-करते बूढ़ा हो गया बाप, बिटिया की उमर सवाल बनकर खड़ी है। राम आर्य व्यथित ने सुनाया बलिदानों की गाथा गाती आई। अंत में हिंदी सेवा समिति अध्यक्ष राम आर्य व्यथित ने सभी का आभार माना।




हिंदी सेवा समिति ने आयोजित की काव्य गोष्ठी