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भीषण युद्ध में लक्ष्मण ने किया खरदूषण का वध
कार्यालय संवाददाता - विदिशा
रामलीला में बुधवार 29 जनवरी को खरदूषण वध व शूर्पणखां की नाक काटने की लीला प्रदर्शित हुई।
लीला क्रम में भगवान चित्रकूट से पंचवटी पहुंचे। वहां पर शूर्पणखां आकाश मार्ग से गुजरती है। वहां से गुजरते समय दोनों भाइयों एवं जानकीजी का रूप देखकर उन पर मोहित हो जाती है। वह सुंदरी का रूप धारण कर रामजी के पास आकर विवाह का प्रस्ताव रखती है।श्रीराम कहते हैं कि मैं विवाहित हूं। वे सुंदरी को श्री लक्ष्मणजी के पास पहुंचा देते हैं। लक्ष्मणजी भी उसके विवाह प्रस्ताव को ठुकरा देते हैं। वह बारी-बारी से श्रीराम एवं लक्ष्मणजी के पास जाती है। अंत में क्रोधित होकर लक्ष्मणजी उसकी नाक काट देते हैं। तब वह रोती हुई अपने भाई खर दूषण के पास जाती है। खरदूषण क्रोध में आकर विशाल सेना लेकर रणभूमि में आता है। दोनों ओर से युद्ध होने के बाद भगवान राम खर-दूषण का वध कर देते हैं।
आज सीता हरण
विदिशा। 30 जनवरी को सीताहरण की लीला का मंचन होगा। लीला में जटायु एवं रावण का युद्ध दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेगा। अपनी बहन शूर्पणखां की नाक कटने तथा खरदूषण की मौत के समाचार से विचलित रावण यह जानते हुए कि खरदूषण को मारने वाला व्यक्ति साधारण नहीं है फिर भी सीताजी के हरण की योजना बनाएगा। मारीच को माया से स्वर्ण मृग का रूप धारण करने के लिए कहेगा। स्वर्ण मृग पर मोहित माता सीता श्रीराम से स्वर्ण मृग को लाने का आग्रह करेगी। सीताजी के आग्रह से श्रीराम भाई लक्ष्मण को सीताजी की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपकर मृग की तलाश में पीछा करते हुए घने वन में जाएंगे।
रामलीला देखने मेला परिसर में बड़ी संख्या में आसपास क्षेत्र के पहुंच रहे लोग
विदिशा। बुधवार को रामलीला में खरदूषण वध का मंचन हुआ।