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हाईकोर्ट ने आदिवासी युवक को दिलाया न्याय
भास्कर संवाददाता - सेंधवा/बड़वानी
बड़वानी के आदिवासी युवक को एक साथ २ बैंकों में नौकरियां मिल गई लेकिन जिस बैंक के लिए दूसरी बैंक की नौकरी से इस्तीफा दिया उसी बैंक ने बाद में उसे नौकरी पर रखने से इनकार कर दिया। सभी प्रक्रिया पूर्ण करने व ८ दिन नौकरी करने के बाद बैंक ने जब युवक के साथ ऐसा किया तो बार-बार निवेदन से परेशान युवक ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने युवक की योग्यता व प्रकरण की सच्चाई को जाना व बैंक प्रबंधन को युवक को वापस नौकरी पर बहाल करने के आदेश दिए।
जिले के राजपुर तहसील के भीलखेड़ा निवासी चैनसिंह पिता बिसनसिंह मुजाल्दे के साथ यह सब हुआ। एमए अर्थशास्त्र में अच्छे नंबरों के साथ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण चैनसिंह को १८ अक्टूबर २०१२ को इलाहाबाद बैंक में छिंदवाड़ा के सिंगोरी में स्थित ब्रांच में एकल खिड़की विंडो ऑपरेटर ए ग्रेड के पद पर नौकरी मिली। घर के समीप नौकरी की चाह में सेंधवा की यूको बैंक में भी आवेदन दिया और चयन हो गया। ३ दिसंबर २०१२ को यहां पर ज्वाइनिंग ले ली। २ दिन काम किया फिर बैंक प्रबंधन ने चैनसिंह को इलाहाबाद बैंक से इस्तीफा देकर आने के निर्देश दिए। ५ दिसंबर को वहां से इस्तीफा देकर लौटे चैनसिंह को ८ दिसंबर को यूको बैंक प्रबंधन ने यह कहकर भेज दिया कि बैंक को आपकी जरुरत नहीं है। जब जरुरत होगी तो आपको रख लिया जाएगा। इस पर चैनसिंह ने प्रबंधक जी मेरिया के समक्ष अपनी बात रखी लेकिन बार-बार प्रबंधन ने उसे टाल दिया। ३ माह तक बैंक के चक्कर लगाने के बाद चैनसिंह ने मार्च में हाईकोर्ट की शरण ली। १० माह बाद ६ जनवरी को हाईकोर्ट ने यूको बैंक प्रबंधन को चैनसिंह को नौकरी पर रखने के आदेश दिए।
५ भाईयों में अकेला चैनसिंह पढ़ा-लिखा - चैनसिहं ने बताया कोर्ट का आदेश लेकर बैंक प्रबंधन से मिलूंगा। घर में हम ५ भाई है। मुझे छोड़कर सभी मजदूरी करते है। मेरे पिता बिसनसिंह मजदूर है। घर में सिर्फ मैं ही पढ़ा-लिखा हूं। इसलिए मेरे माता-पिता व भाई चाहते है कि मैं नौकरी करुं। परिवार से पढ़ा-लिखा एक सदस्य यदि नौकरी करेगा तो सभी परिजनों को गर्व और खुशी मिलेगी।
विचाराधीन है मामला
॥हमने युवक के साथ कुछ गलत नहीं किया। अपाइंटमेंट लेटर देते समय ही यह स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी संस्थान में नियमानुसार वह नौकरी पर है तो यहां नौकरी नहीं मिल पाएगी। यह मामला झोन ऑफिस में विचाराधीन है। आगे की सारी प्रक्रिया वहीं से पूरी होगी। वैसे वर्तमान में मेरा सेंधवा ब्रांच से स्थानांतरण हो गया है।ø
-जी मेरिया, तत्कालीन बैंक प्रबंधक, यूको बैंक शाखा, सेंधवा
॥वैसे हमें हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी नहीं मिली है। कॉपी मिलने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।ø
-एस गलवंशी, अधिकारी, झोन ऑफिस, इंदौर