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बदनावर में सातवें दिन भी नीलामी नहीं

7 वर्ष पहले
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बदनावर - कृषि उपज मंडी में खाद्य सुरक्षा अधिनियम से अनाज व्यापारियों को बाहर रखने की मांग को लेकर मंडी में नीलामी कार्य सातवें दिन भी बंद रहा। नगर का संपूर्ण कारोबार मंडी पर निर्भर होने के कारण बंद के चलते बाजार वीरान हो गए हैं। व्यापार घट कर 10 प्रतिशत रह गया है। किराना, कपड़ा, बर्तन, खाद बीज, कृषि यंत्र विक्रेता फुरसत में नजर आ रहे है। होटल एवं पान की दुकानों से भी बिक्री गायब हो गई है। छोटे लोडिंग एवं भारी वाहन भी पार्क कर दिए गए है। परिसर सुनसान हो गया है। खासकर हम्मालों की भारी फजीहत हो गई है। तुलैया भी आर्थिक तंगी का शिकार हो रहे है। व्यापारी संगठन मांगे मंजूर नहीं होने तक आंदोलन की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि अधिनियम के चलते वे हल्का माल नहीं खरीद पाएंगे। ऐसे में किसानों में असंतोष फैलने का भय रहेगा। मंडी बंद होने से शासन को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। नगर का कारोबार चौपट हो गया है। मंडी बंद होने के बावजूद 21 से 27 जनवरी के मध्य 2305 क्ंिवटल के सौदे पत्रक मंडी में बनने से सवाल भी खड़े हो रहे हैं। जबकि स्टॉक एवं टैक्सपेड उपज के ही जावक करने के आदेश हैं।
9 करोड़ की उपज की बिक्री होती
कृषि उपज मंडी में हड़ताल के पूर्व लगभग 4 हजार बोरे की आवक प्रतिदिन होकर 1.5 करोड़ रुपए की उपज नीलाम हो रही थी। बंद के कारण 9 करोड़ रुपए की उपज बिक्री से वंचित रह गई। मंडी को लगभग 18 लाख रुपए का मंडी टैक्स का नुकसान हुआ है। व्यापारियों की माने तो मंडी चलने पर लगभग 70 लाख रुपए प्रतिदिन का मनी फ्लो नगर में बना रहता है, लेकिन वह घटकर 7-8 लाख रुपए रह गया है। व्यापारी कमलेश संघवी, पारस बोकडिय़ा, सुरेंद्र छाजेड़, विजय बाफना, शांतिलाल मूणत के मुताबिक मंडी बंद होने से व्यापार चौपट हो गए हैं। ट्रांसपोर्टर अय्यूबभाई ने बताया कि सभी ट्रक खड़े हो गए हैं। चालक एवं क्लीनरों के भत्ते के भी की भी दिक्कत है। हम्माल कैलाश, प्रकाश, गोवर्धन आदि ने बताया मंडी में 500 हम्माल तुलैया अनुज्ञप्तिधारी है, अनेक रोज कमाकर रोज खाने वाले हैं। महंगाई के इस समय में परिवार का पोषण करना मुश्किल हो रहा है। कर्ज लेकर काम चला रहे है।