मुनि सोभाग्यविजयजी का देवलोकगमन
राजगढ़ - मोहनखेड़ा तीर्थ के मुनि सोभाग्यविजयजी ((८५)) का रविवार-सोमवार की रात में देवलोकगमन हो गया। उन्होंने कुल ६७ चातुर्मास किए। जावरा व नागेश्वर महातीर्थ पर गुरु मंदिर की प्रतिष्ठा मुनिश्री की निश्रा में हुई थी। अंतिम यात्रा राजगढ़ के प्रमुख मार्गों से गुजरी। जयंतसेन म्यूजियम के सामने ज्योतिषाचार्य जयप्रभविजयजी के समाधि मंदिर के समीप पंचतत्व में विलीन हुए। अग्निवेदिका पर विराजमान की बोली सेवंतीलाल मथुरालाल मोदी परिवार राजगढ़ और अग्नि संस्कार की बोली सुंगधीलाल वेणीराम सराफ परिवार ने ली। आचार्य जयंतसेन सूरीजी, आचार्य रवींद्रसूरीजी, उपाध्याय नरेंद्रविजयजी व चंद्रयशविजयजी के शोक संदेश का वाचन किया गया।
तीर्थ पर विराजित ऋषभ चंद्रविजयजी, हितेशचंद्रविजयजी, दिव्यचंद्रविजयजी और महेंद्रश्रीजी आदि ठाणा ने विदाई दी। बड़ी संख्या में नगर के लोग व तीर्थ से जुड़े सदस्यों ने श्रद्धांजलि दी। राजगढ़ त्रिस्तुतिक संघ ने राजेंद्र भवन, म्यूजियम ट्रस्ट ने म्यूजियम के सामने कांबली ओढ़ाई। अभा नवयुवक परिषद ने परिषद भव के समीप पुष्पांजलि अर्पित की।