मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़
डीजे लेबोरेटरीज पीथमपुर से संक्रमण रोकने का इंजेक्शन सिप्रोलोक्सेसिन 100 एमएल की सप्लाई प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में की जा रही है। इस इंजेक्शन के अमानक होने की शिकायत होने के बाद भी कंपनी न तो इसे बदल रही है और न ही वापस ले रही है।
 रिकॉर्ड देखकर ही बता सकता हूं सप्लाई के बारे में
रिकॉर्ड देखकर ही कुछ बता पाऊंगा कि हमने दवा सप्लाई की है या नहीं। अभी मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
सनद गोयल, सीनियर अकाउंटेंट, डीजे लैबोरेटरीज, पीथमपुर, मप्र
 इंदौर में सावधानी बरतने के लिए कहा
सिप्रोफ्लोक्सेसिन इंजेक्शन के मामले में जो परेशानी प्रदेश के दूसरे सरकारी अस्पतालों में आई है, उसको लेकर इंदौर में सावधानी बरतने के लिए स्वास्थ्य विभाग से कल ही हमारे पास पत्र आया है। इसे हमने सभी शासकीय चिकित्सालयों में भेज दिया है।
डॉ. अशोक डागरिया, सीएमएचओ, इंदौर
डीबी स्टार :इंदौर/भोपाल
प्रदेशभर में सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दी जा रही दवाइयों की गुणवाा पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्वालियर के एक सरकारी अस्पताल के प्रबंधन ने फरवरी 2012 में डीजे लेबोरेटरीज पीथमपुर को सिप्रोलोक्सेसिन 100 एमएल सप्लाई करने का ऑर्डर दिया था। कंपनी की रिपोर्ट पर अस्पताल प्रबंधन ने भुगतान भी कर दिया। दवा दो बैच में उपलध कराई गई, जिसमें दूसरे बैच 12डी034 नंबर का मरीजों को लगाया गया, तो वे ठंड से कांपने लगे। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने इंजेक्शन की करीब 3200 शीशियों को इकट्ठा कर स्टोर में जमा करा दिया।
कंपनी को अच्छी गुणवाा की दूसरी दवा उपलध कराने या पैसा वापस करने के लिए पिछले साल नवंबर और दिसंबर में दो बार पत्र भी लिखे गए, लेकिन कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। अब प्रबंधन के सामने समस्या यह खड़ी हो गई है कि इंजेक्शन की एक्सपायरी फरवरी 2014 है। ऐसे में संचालनालय के अधिकारियों से कंपनी पर कार्रवाई करने के लिए मार्गदर्शन मांगा है। प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में कंपनी की गुणवाा रिपोर्ट पर ही भुगतान हो रहा है। सवाल उठता है कि कोई कंपनी अपनी ही दवाओं को अमानक क्यों कहेगी?
पूरे प्रदेश में यही हाल
प्रदेश में सप्लाई हो रही दवाओं की जांच के लिए पहले तमिलनाडु मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन से संबद्ध लैब को जिम्मा सौंपा गया था, लेकिन वर्ष 20112012 में यह अनुबंध खत्म हो गया। तब से कोई नया अनुबंध हुआ ही नहीं है। वर्ष 2013 में जिला ड्रग इंस्पेक्टरों को जिला अस्पतालों से दवाइयों के नमूने लेने के निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन इसका पालन भी नहीं किया गया।
कार्रवाई का भय नहीं
जानकार मानते हैं कि प्रदेश की दवा नीति में ही खोट है। दरअसल इसमें सजा का कोई प्रावधान ही नहीं है, इसलिए अमानक दवा सप्लाई करने वालों के मन में कोई खौफ नहीं है। मौजूदा नियम में प्रावधान है कि अमानक दवा की सप्लाई पाए जाने पर तय मानक की दवा उपलब्ध कराई जाए या फिर पैसा वापस किया जाए, लेकिन इसमें दोषी को कोई सजा देने की व्यवस्था नहीं है।
लापरवाही & सिप्रोलोक्सेसिन 100 एमएल का इंजेक्शन लगते ही ठंड से ठिठुरने लगे मरीज, प्रदेशभर में हो रही है सप्लाई