माता-पिता भी हों जागरूक
डॉ. मनोज पाटील ने कार्यकर्ताओं को बताया अच्छी गुणवत्ता और सही मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिलने से कुपोषण होता है। सफाई की ओर ध्यान नहीं देना, भोजन पोषक नहीं होना, पीने के पानी में खराबी होना, घरेलु खाद्य पदार्थों की सही प्रकार से देखभाल नहीं करना भी कुपोषण का कारण है। गरीबी, बेरोजगारी, बाढ़, सूखा पडऩा कुपोषण के सामाजिक कारण हैं। इसलिए इन सभी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इससे ही कुपोषण पर अंकुश लगाया जा सकेगा। इसके लिए कार्यकर्ताओं सहित माता-पिता का भी जागरूक होना जरूरी है।
कुपोषण से 9 गुणा बढ़ता है मौत का खतरा
भास्कर संवाददाता - डोइफोडिय़ा
कुपोषण से मौत का खतरा 9 गुणा बढ़ जाता है। बच्चा पढऩे-लिखने में कमजोर हो जाता है। साथ ही अन्य बीमारियां भी हो जाती हैं। बड़े होने पर शारीरिक कमजोरी और थकान के कारण रोजगार में भी दिक्कत आती है। कुपोषण को सूखा रोग और सूजा रोग भी कहते हैं। कुपोषण से बच्चा सूख जाता है या फिर शरीर पर सूजन आ जाती है। शरीर में एमयूएसी 115 से कम है तो इसे गंभीर कुपोषण माना जाता है। कुपोषण के लक्षण दिखते ही तुरंत जांच कराएं। बच्चों को पौष्टिक भोजन दिया जाए। कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराना चाहिए।
बुधवार दोपहर डोईफोडिय़ा आंगनवाड़ी केंद्र में मास्टर ट्रेनर डॉ. मनोज पाटील ने 30 से अधिक आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को यह जानकारी दी। कार्यकर्ताओं को एसीएफ इंटरनेशनल संस्था द्वारा कुपोषण को लेकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दो दिनी प्रशिक्षण में कार्यकर्ताओं को कुपोषण, इसके कारण, परिणाम और प्रभावों से अवगत कराया जा रहा है। कार्यकर्ताओं को कुपोषण से बचाव के तरीके बताए जा रहे हैं। यह कवायद कुपोषण में कमी लाने के लिए की जा रही है। दिनी प्रशिक्षण का गुरुवार को अंतिम दिन रहेगा। डॉ. पाटील के साथ सुपरवाइजर संजय महाजन भी कार्यकर्ताओं को जरूरी जानकारी दे रहे हैं।
डोईफोडिय़ा आंगनवाड़ी केंद्र में प्रशिक्षण, आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ता हो रहीं शामिल