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नर्मदा में डीजल बोट की जगह ले सकते हैं इलेक्ट्रिक बोट

7 वर्ष पहले
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विशाल गीते - महेश्वर
नर्मदा की कलकल लहरों में बसे प्रकृति के संगीत का नाद। साफ हवा में सांस की आस। शांति और अध्यात्म का गहरा प्रवाह। इस अनुभव को महसूस करने पवित्र,पर्यटन और धार्मिक नगरी का दर्जा प्राप्त महेश्वर में हर साल लाखों सैलानी पहुंचते हैं। महसूस करने का क्रम शुरू होता है इससे पहले नर्मदा में मौजूद बोट की कर्कश आवाज, इंजन से उठता डीजल का काला धुआं शांति में खलल पैदा कर देता है। कलेक्टर डॉ.नवनीत मोहन कोठारी ने हाल ही में महेश्वर में नर्मदा घाट के निरीक्षण के दौरान इस बात को गंभीरता से लिया। नाविकों से कहा सैलानियों को आनंद तभी आएगा जब बोट ध्वनिरहित होंगे। डीजल का धुआं नहीं उड़ेगा। उन्होंने चीनी बोट की तरह महेश्वर में भी बोट चलाने का सुझाव दिया। नाविकों ने मानसिकता बदली तो नर्मदा में चलने वाले डीजल बोट की जगह जल्द ही ध्वनिरहित इलेक्ट्रिक बोट ले सकेंगे।
चीन सहित कई पश्चिमी देशों में उपयोग लाए जा रहे इलेक्ट्रिक बोट महेश्वर में उपयोग में लाए जा रहे बोट से ज्यादा उपयोगी व प्रदूषणरहित हैं। कलेक्टर का कहना है नाविकों की मानसिकता बदले तो प्रशासन हर संभव मदद को तैयार है। बोट में तकनीकी बदलाव से पर्यटकों के साथ नाविकों को भी राहत मिल सकती है।




हम चाहते हैं बदलाव, सहायता मिलें

नाविक जितेंद्र केवट ने बताया हम बदलाव चाहते हैं। नर्मदा को प्रदूषित नहीं देखना चाहते। साथ ही सैलानियों को कर्कश आवाज से बचाना भी चाहते हैं। रोजी-रोटी के लिहाज से भी डीजल बोट का सौदा महंगा साबित हो रहा है। सरकारी सहायता की दरकार है।

इलेक्ट्रिक बोट की खासियत

ञ्च 19 वीं सदी के उत्तराद्र्ध में पश्चिमी देशों में इलेक्ट्रिक बोट बनने लगे थे।

ञ्च इलेक्ट्रिक बोट ध्वनिरहित और प्रदूषणरहित होने से अब बेहद डिमांड।

ञ्च लागत के हिसाब से भी बेहतर, डीजल बोट 2 से 5 लाख रुपए के। इलेक्ट्रिक बोट 6 सीटर 3 से 6 लाख रुपए में।

ञ्च मुंबई व दिल्ली में डीलर उपलब्ध।

ञ्च डीजल मोटरबोट में भी तकनीकी बदलाव से इलेक्ट्रिक बोट बनाया जा सकता है।

35 बोट महेश्वर में नर्मदा में हैं, सभी डीजल बोट।

त्र 500 रोजाना प्रति बोट सिर्फ डीजल पर खपत।

त्र 1000 खर्च काटकर आमदनी, मेहनताना भी शामिल।

फिलहाल इस्तेमाल डीजल बोट की स्थिति



कार से भी ज्यादा प्रदूषण करती है मोटरबोट

अमेरिकन स्टीवन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की रिपोर्ट के मुताबिक एक घंटा डीजल मोटरबोट चलने पर उतना ही प्रदूषण करती है जितनी 1300 किमी. चलने पर डीजल कार। मोटरबोट से तेल के रिसाव व गैसोलीन से यह जल प्रदूषण बढ़ाता है। वायु में हाइड्रोकार्बन व नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा डीजल मोटरबोट से बढ़ती है।

महेश्वर में नर्मदा काफी प्रदूषित

मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दो साल पहले आखिरी बार बायोमैपिंग सर्वे कराया था। सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक अमरकंटक से बड़वानी तक 30 स्थानों से सैंपल लिए गए थे। इसमें अमरकंटक का रामघाट, होशंगाबाद के एसपीएम नाले के पास और महेश्वर एमपी टूरिज्म होटल के पास सबसे ज्यादा प्रदूषण मिला। चार बार सैंपल लिए गए। चारों बार सी ग्रेड प्रदूषण का स्तर रहा। ए ग्रेड में साफ, बी में हल्का प्रदूषित, सी ग्रेड को ज्यादा प्रदूषित, डी व ई को गंभीर की श्रेणी में रखा गया।

बदलाव की दरकार

कलेक्टर ने कहा-नाविक मानसिकता बदले तो हर संभव मदद को तैयार, पर्यटकों के साथ नाविकों को भी मिलेगी राहत