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शिक्षा का आधार विद्यार्थी जीवन को बनाना चरित्रवान
भास्कर संवाददाता - खेतिया
हम सभी मां सरस्वती को आराध्य मानते हैं। रोजाना उन्हें प्रणाम करना चाहिए। हमें विश्व को दिशा देना है तो हमारा बौद्धिक, मानसिक, शारीरिक विकास के साथ-साथ चरित्र का निर्माण भी करना होगा। विश्व वर्तमान में भारत और आशा की किरण और शांति के लिए देख रहा है। हमें वर्तमान शिक्षा पद्धति का आधार चरित्रवान बनाना होगा। स्वामी विवेकानंद, सुभाषचंद बोस, देश पर प्राण न्यौछावर करने वाले महापुरुषों को आदर्श मानकर हम भारत को पुन: विश्व गुरु बना सकते हैं।
शैक्षणिक संस्था वेदांत गुरुकुल मा. विद्यापीठ में पुरस्कार वितरण के दौरान मुख्य अतिथि संत श्री दिव्यानंदजी भारती दीदी ने ये बातें कही। कार्यक्रम का शुभारंभ संत श्री दिव्यानंदजी भारती दीदी, श्रीश्री 1008 पपू संत लालानंदजी भारती, आजा सेवा समिति अध्यक्ष हीरालाल यसीकर, नपं उपाध्यक्ष किशोर चौधरी, रवींद सोनी ने भारत माता, सरस्वती मां, स्वामी विवेकानंद एवं सुभाषचंद बोस की पूजा-अर्चना कर किया। इसमें शिक्षिका अनिता पटेल ने शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण एवं स्वावलंबन हो पर विचार व्यक्त किए। शिक्षिका मेधा पटेल ने एकल गीत उठो साथियों समय नहीं है ये शोभा शृंगार का प्रस्तुत किया। साथ तेजस्वी सोनी, यश जाधव, पंकज नितेंद्र पाटील, सागर हिवरे, रचिता सोनवणे, दुर्गेवरी यसीकर, जयेश चौधरी ने भी प्रस्तुति दी। रवींद्र मोतीराम सोनी ने उनकी पुत्री स्व. स्नेहा की स्मृति में हर वर्ष पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को
कक्षा में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने पर स्मृति चिंह दिया जाएगा। इस योजना का शुभारंभ इसी वर्ष से संत श्री दिव्यानंदजी भारती दीदी ने किया। संस्था का प्रगति प्रतिवेदन छोटूलाल सोनी ने प्रस्तुत किया। अतिथियों ने विजेताओं को पुरस्कृत किया। आभार संस्था के संचालक संतोष पंवार ने माना।
कार्यक्रम का शुभारंभ करती संत श्री दिव्यानंदजी भारती दीदी।
स्व. स्नेहा सोनी की स्मृति में स्नेहा प्रतिभा सम्मान योजना के शुभारंभ पर संत श्री दिव्यानंदजी भारती दीदी ने कहा