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३ कार सवार बैंक मैनेजर को अगवा कर ले गए थे, ४ दिन बाद लुधियाना में छोड़ा
भास्कर न्यूज - अमृतसर
‘मैं थोड़ा-थोड़ा बेहोशी की हालत में था और अचानक अपहरणकर्ताओं ने मुझे गाड़ी से बाहर निकल कर भाग जाने के लिए कहा। गाड़ी से निकल कर मैं फुटपाथ पर बैठ गया और पास से गुजर रहे एक व्यक्ति से पूछा कि कौन सी जगह है तो बताया कि यह लुधियाना में जालंधर बाइपास पर है। अचानक वहां पर एक बस आकर रुकी, कंडक्टर जालंधर की आवाज लगा रहा था। मैं हिम्मत कर उस बस में सवार हो गया और जालंधर पहुंच गया। वहां से मैं मुकेरियां की बस में बैठ गया।’ यह कहना है 18 जनवरी को अचानक लापता हुए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मैनेजर चंद्रेश सैनी का। सैनी के मुताबिक उन्हें तीन लोग अगवा कर ले गए थे। अपहरणकर्ता कौन थे और उन्हें क्यों अगवा किया गया, वह नहीं जानते। वह शनिवार को छेहर्टा की महिला आशा किरण जो बैंक की डिफाल्टर है, के पास जाने के लिए बैंक से निकले थे, ताकि उसे कह सकें कि बैंक में लगाए जाने वाले कैंप में पहुंच कर अपने केस की सेटलमेंट करवा ले। बैंक से निकल कर उन्होंने ऑटो लेना था। इसी दौरान एक कार में ३ लोग आए और आवाज देकर उन्हें बुला लिया। वह उनके पास गए तो उनमें से एक ने उनके मुंह पर कपड़ा रख दिया। वे लोग उन्हें कब-कब, कहां-कहां लेकर जाते रहे कुछ मालूम नहीं। बुधवार शाम को वे उन्हें लुधियाना में छोड़कर चले गए। सैनी की पत्नी सुदेश ने बताया कि उनके रिश्तेदार रोहित ने सैनी को मुकेरियां की बस में बैठे हुए देखा और उन्हें फोन कर दिया। वह भी यहां से पुलिस के साथ तुरंत उन्हें लेने के लिए निकल पड़े और रात दो बजे लेकर घर आ गए।
गुहार - मैनेजर और उनकी पत्नी सुदेश सैनी ने पुलिस से गुहार लगाई गई कि पूछताछ के समय घर के एक सदस्य को चंद्रेश के रहने की इजाजत दी जाए।
मेडिकल करवाकर होगी पुष्टि : एडीसीपी अमरीक सिंह पवार
बैंक मैनेजर के वापस आने पर एडीसीपी अमरीक सिंह पवार ने कहा कि उनके बयान दर्ज कर लिए हैं और अपहरणकर्ताओं को ढूंढने के लिए कार्रवाई भी शुरू कर दी है। मैनेजर का मेडिकल करवा कर रिपोर्ट से पता चलेगा कि उन्हें किस चीज के साथ बेहोश रखा गया था।
मैं बेहोशी में था, उन्होंने मुझे गाड़ी से निकाला और कहा-भाग जाओ : चंद्रेश