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पाक जाने वाले प्राइवेट जत्थों पर रोक लगाने संबंधी जत्थेदार मक्कड़ के बयान पर जत्थेबंदियां ने जताई आपत्ति

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - अमृतसर
पाकिस्तान जाने वाले निजी जत्थों पर एसजीपीसी के बयान पर ऐसी जत्थेबंदियों ने ऐतराज जताया है। इनका कहना है कि कमेटी अपना जत्था ले जाए, कोटा बढ़ाने की मांग करे मगर उन लोगों को रोक लगवाने वाली कौन होती है।
ये था मामला : कमेटी के प्रधान जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा था कि वह पाकिस्तानी पंजाब के सांसद रमेश सिंह के न्यौते पर वहां जाएंगे। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा था कि वह वहां के गुरुधामों के दर्शन-दीदार को जाने वाले जत्थों का कोटा बढ़ाने तथा निजी तौर पर जाने वाले जत्थों पर रोक लगाने की मांग भी करेंगे। मक्कड़ के इसी बयान पर निजी तौर पर जत्था ले जाने वाली संस्थाओं ने आपत्ति जताई है।
ऐतराज : मक्कड़ के इस बयान पर साईं मियां मीर इंटरनेशनल फाउंडेशन के प्रधान जत्थेदार हरभजन सिंह बराड़ और भाई मरदाना कीर्तन दरबार सोसायटी के प्रधान जत्थेदार हरपाल सिंह भुल्लर का कहना है कि कमेटी अपना जत्था ले जाए मगर वह दूसरे मुल्क में दूसरी संस्थाओं को कैसे रोक लगवा सकती है। उनका कहना है कि एसजीपीसी का हमेशा ही पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से 36 का आंकड़ा रहा है और उसके कारण संगत को दिक्कत आती है।
ढाई दर्जन संस्थाएं ले जाती हैं जत्था : पाकिस्तान गुरुधामों के दर्शन-दीदार को साल में चार बार जत्था जाता है। गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व, बैसाखी का पर्व, श्री गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस और महाराजा रणजीत सिंह की बरसी शामिल हैं। दो समारोह में 4000-5000 और दो में 1000 के करीब श्रद्धालु शामिल होते हैं। बराड़ का कहना है कि आमतौर पर एसजीपीसी की तरफ से 600 से 700 लोग जाते हैं, जबकि बाकी के अन्य को दूसरी संस्थाएं लेकर जाती हैं। देश से करीब 30 संस्थाएं जत्थे ले जाती हैं। यह काम अकेले एसजीपीसी के बस का नहीं है।