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खेल प्रतिभा खोजना कठिन प्रकिया : प्रो अलेग्जेंडर

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - अमृतसर
खेलों के क्षेत्र में प्रतिभा की खोज और चुनाव मुश्किल प्रक्रिया है। अध्ययन का उद्देश्य प्रतिभा खोज प्रणाली की अच्छी तरह से जांच-पड़ताल करके फैसला लेना है कि मौजूदा चुनाव प्रक्रिया को किस प्रकार प्रभावी बनाया जा सके, ताकि सही खिलाडिय़ों का चुनाव हो सके। यह शब्द फिजिकल एजुकेशन हैल्थ एंड स्पोट्र्स साइंसिज विषय पर गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में आयोजित ग्लोबल साइंटिफिक कांफ्रेंस ‘ग्लोप्स’ के मुख्य भाषण के दौरान स्कूल ऑफ हैल्थ कैंपस यूएसएम मलेशिया के प्रो. अलेग्जेंडर करासिलसैचीकाउ ने कहे। उन्होंने कहा कि विश्व के खेलों के क्षेत्र में विभिन्न प्रमुख देशों में उपलब्ध खिलाडिय़ों की चुनाव प्रणाली की जांच और मूल्यांकन किया जाना चाहिए। इस समय में नए वैज्ञानिक तरीकों के माध्यम से ही खिलाडिय़ों को ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। चुने गए खिलाडिय़ों को उनकी काबिलियत व रुचि के अनुसार ही ट्रेनिंग दी
जानी चाहिए।
कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर ओलिंपिक खिलाड़ी ब्रिगेडियर लाभ सिंह मुख्य मेहमान थे। डीन अकादमिक प्रो. एमएस हुंदल ने कांफ्रेंस की प्रधानगी की। विभाग मुखी और डीन डॉ. सुखदेव सिंह ने विभाग की गतिविधियों के बारे में बताया। रजिस्ट्रार डॉ. इंद्रजीत सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया।ब्रिगेडियर लाभ सिंह ने कहा कि खिलाड़ी के लिए शारीरिक शिक्षा ही सेहत और खेल जीवन का आधार है। हुस्न, जवानी और मां-बाप कभी वापिस नहीं आते और जिंदगी का फलसफा भी इसी के आस-पास घूमता है। आध्यात्मिक और नैतिक मूल्य ही सफल जीवन का मूल-मंत्र है। इसके उपरांत कॉमर्शियलाइजेशन ऑफ इंडियन स्पोट्र्स पर टेबल टॉक का भी आयोजन किया गया। इसमें ब्रिगेडियर हरचरण सिंह ने बताया कि 1979 में जब उन्हें अर्जुन अवार्ड मिला तो वह पहले हॉकी प्लेयर थे, जिसे अवार्ड के साथ कैश ईनाम भी दिया गया। उससे पहले सरकार का मानना था कि अगर प्लेयर को पैसे दिए जाएं तो वह भटक जाएंगे। प्लेयर साइक्रेटिक डॉ. अविनाश सिद्धू और डॉ. रूपा सैनी ने कहा कि खेलों में पैसा होना चाहिए और उसी हद तक होना चाहिए कि एक खिलाड़ी सुखी व इज्जत के साथ जीवन निर्वाह कर सके।
डॉ. सुखदेव सिंह ने बताया कि इस कांफ्रेंस में 600 से अधिक विद्वानों ने भाग लिया। कांफ्रेंस से हर किसी को काफी कुछ सीखने के अवसर मिलेंगे। इस दौरान पंजाबी यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के पूर्व प्रोफेसर डॉ. गुरबख्श सिंह, पूर्व वीसी जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर डॉ. एके उप्पल, पूर्व प्रिंसिपल प्रो. एमएल कमलेश, पूर्व वीसी लक्ष्मी बाई नेशनल यूनिवर्सिटी प्रो. केके वर्मा को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।



भूगौलिक क्षेत्र को ध्यान में रखकर ही करें चयन

प्रो. अलेग्जेंडर ने बताया कि खिलाडिय़ों का चयन भूगौलिक क्षेत्र को ध्यान में रखकर करना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्र के युवा ऊंची छलांग, राजस्थान के युवा ऊंचे कद के चलते बास्केटबॉल, बिहार के युवा तीरंदाजी, और केरल के युवा बोटिंग में नाम कमा सकते हैं। इसके पीछे मुख्य कारण इन युवाओं को सामाजिक स्वभाव और आचरण इन्हें खेलों के प्रति आकर्षित कर सकता है। खिलाडिय़ों को काबिलियत के आधार पर अच्छे कोच और बुनियादी ढांचा मुहैया करवाना चाहिए।

आगाज - कांफ्रेंस का शुभारंभ ओलंपियन लाभ सिंह ने किया। इस दौरान प्रो. अलेग्जेंडर, रजिस्ट्रार इंद्रजीत सिंह आदि मौजूद थे।